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अंदाजे 60 लाख ज्यू लोगों का नरसंहार करनेवाला हिटलर, लोगों का ब्रेनवाश करके सत्ता में आने के लिए 70 फीसदी घरों में रेडिओ लगवाए थे। हिटलर की प्रचार निती। Adolf Hitler propogenda

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            क्या आप जानते है? TV पर किसी भी चीज की ad बारबार क्यो दिखाई जाती है। क्या आप जानते है? इसके पीछे क्या लॉजिक होता है? आईए समझते है। अगर किसी भी चीज को बारबार दिखाया जाता है। या फिर दोहराया जाता है। मतलब वो चीज लोगो के आँखों के सामने अगर बारबार आती है। तो लोगों का उस चीज पर विश्वास बढ़ने लगता है। लोगों के सामने वो चीज बारबार आने से लोगों की उस चीज मे दिलचस्पी बढ़ने लगती है। इसका लोगों पर ये असर असर होता है कि, लोग उस चीज को खरीदने लगते है। अक्सर कम्पनीया अपना सेल बढ़ाने के लिए इस तरह के हतकंठे हमेशा यूज करती है। Advertisement सेल बढ़ाने का सबसे कारगर तरीका माना जाता है। 

         अब आप सोचते होंगे की, इसका हिटलर के साथ क्या लेना देना है। आइए जानते है। 

         हिटलर का मानना था कि, अगर कोई बात लोगों के सामने बारबार दोहरायी जाए, तो लोग उस बात पर विश्वास करने लग जाते है। उसे सच मानने लग जाते है। 

         हिटलर की यह नीति जिसने वास्तव में अमल मे लाई उस शक्स का नाम था, जोसेफ गोबेल्स। जोसेफ गोबेल्स हिटलर के सबसे विश्वासू साथियों मे से एक था। ये हिटलर के विचारों का कट्टर समर्थक था। इसे हिटलर के प्रचार तंत्र का जनक भी माना जाता है। माना जाता है कि, हिटलर के उस सोच को गोबेल्स ने  प्रचार तंत्र की तरह यूज किया। जिसका परिणाम ये हुआ था की, हिटलर सत्ता में आ गया और सत्ता में बना भी रहा। 

        हिटलर के विचार जनता तक पहुँचाने में गोबेल्स की अहम भूमिका मानी जाती है। नाझी पार्टी का प्रचारक, संपादक, प्रचारमंत्री, युद्धमंत्री और एक दिन का चान्सलर यह सारी भूमिकाएं जोसेफ गोबेल्स ने हिटलर के लिए निभाई। दूसरे महायुद्ध के दौरान जर्मनीयो के दिमाग में ज्यू लोगों के खिलाफ नफरत पैदा करने का काम, अपने प्रचारतंत्र के बल पर गोबेल्स ने किया। अंदाजे 60 लाख ज्यू लोगों का नरसंहार करने मे जितना जिम्मेदार हिटलर है। उतना ही जिम्मेदार जोसेफ गोबेल्स भी है। इसी कारण गोबेल्स को 20 वी शताब्दी का सबसे भयंकर गुन्हेगारो में से एक माना जाता है। 

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          हिटलर अपने जीवन के आखरी सांस तक जर्मनी का हुकुमशाह बना रहा। इसी बीच कई कठिनाईयों का सामना हिटलर को करना पड़ा। इस कठिन वक्त मे भी जर्मनी की जनता हिटलर के साथ खड़ी थी। जनता के सपोर्ट के कारण ही हिटलर अपने पद पर बना रहा। 

         ज्यू लोगों का होने वाला नरसंहार और उनके प्रती हिटलर की नफरत सभी देशवासी जानते थे। लेकिन कोई भी इसका विरोध नहीं करता था। इसका खास कारण था हिटलर द्वारा किया गया ज्यू लोगों के खिलाफ नफरती प्रोपोगेंडा। ज्यू देशद्रोही होते है। देश में जो कुछ भी गलत हो रहा है उसका एकमात्र कारण ज्यू लोग ही है। इस प्रकार की नफरत हिटलर ने लोगों के दिलो दिमाग में इस प्रकार भर दी थी की, लोग भी ज्यू लोगों को गलत मानने लग गए थे। और सभी को ये लगने लगा था की, हिटलर इनके साथ जो कुछ भी कर रहा है। वो सही है। 

         आम इंसान विश्लेषक या विचारवंत नहीं होता। इसलिए आसान भाषा में और कम शब्दों में हमारे संदेश उनतक पहुँचने चाहिए। ऐसा हिटलर का मानना था। नाझी पार्टी का प्रचार विभाग भी हिटलर के इस सोच से सहमत था। इसलिए नाझी पार्टी ने हिटलर के चुनाव प्रचार के लिए आसान भाषा वाले ही प्रचार पोस्टर पूरे जर्मनी में लगवाए थे। जबकी बाकी पार्टियों ने बड़ी बड़ी घोषणाओ के अलग अलग कलर के पोस्टर लगवाए थे। नाझी पार्टी  ने जो पोस्टर लगवाए थे वे काले रंग के पृष्ठभूमि वाले, जिस पर हिटलर का चेहरा और नाम था। ना कोई बड़ी पार्टी की घोषणा थी और नहीं उन पोस्टरों पर अपने ही पार्टी का नाम था। फिर भी हिटलर के पोस्टर अपने अट्रैटीव लुक के कारण ज्यादा लोकप्रिय हो गए थे। 

         ऐसा माना जाता है कि, अपने हायलाइट के कारण ही ये पोस्टर पूरे जर्मनी लोकप्रिय हो गए थे। इसके पीछे का तर्क, हिटलर दिया हुआ सुझाव था। 

         हिटलर के इस तरह के प्रचार नीति के कारण, 1934 मे हिटलर को सत्ता में आने में काफी मदत मिली। सत्ता में आते ही हिटलर ने अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए साम दाम दंड भेद का उपयोग किया। जो भी कला साहित्य हिटलर या नाझी पार्टी  के विचारधारा से अलग सोच रखता था उन पर बैन लगा दिया गया था। जो साहित्य हिटलर का समर्थक होता, उनको प्रोत्साहित किया जाता था। उनको अवार्ड दिये जाते थे। चित्रपटो का भी हाल कुछ इस प्रकार ही था। जो भी चित्रपट हिटलर के विचारधाराओं का विरोधक होता था। या फिर अगर उन चित्रपटो की मदत से हिटलर की छबि खराब होने की आशंका नजर आती थी, तो उनको रिलीज नहीं होने दिया जाता था। हिटलर के सत्ता में आते ही एक साल के भीतर जर्मनी में 1600 अखबारो पर बैन लगा दिया गया। क्युकी वे हिटलर की विचारधारा देश के लिए कैसे घातक है? ये बताती थी। ऐसा कहा जाता है कि, कोई भी खबर छापने से पहले उनकी पड़ताल की जाती थी। इन सब कामों के लिए हिटलर ने अधिकारियों की नियुक्ति की हुई थी। ऐसा माना जाता है कि, जर्मनी में जो अखबार छपते थे। उन मे से 70 प्रतीशत अखबार नाझी पार्टी  के खुद के थे। ज्यू पत्रकारों पर भी बैन लगा दिया गया था। 

          जर्मनी में उन्ही मनोरंजन कार्यक्रमों को फिल्मों को रिलीज करने की परमिशन दी जाती थी। जो हिटलर के नाझीवाद से प्रेरित होते थे। 

       हिटलर ने अपनी आदर्श प्रतिमा लोगों के दिलों में बनाने के लिए कला, साहित्य और मनोरंजनात्मक जैसे उन सभी साधनों का इस्तेमाल किया जो लोग इस्तेमाल करते है। इन सभी साधनों के जरिए जनता को यह बारबार बताया या फिर दिखाया जाता था कि, हिटलर देश का भविष्य है। हिटलर ही देश का स्वाभिमान है। हिटलर के चलते ही देश प्रगतिपथ पर है। हिटलर के कारण ही जर्मनी आज दुनिया का सबसे ताकतवर राष्ट्र बन कर आगे आया है, जबकी बाकी शासको के दौरान देश का हमेशा विघटन हुआ है। हिटलर एक राष्ट्र निर्माता है।  इस तरह का प्रोपोगेंडा इन सभी के मध्यम से हमेशा चलाया जाता था। 

            1939 के दरम्यान जर्मनी में रेडिओ काफी लोकप्रिय हो गया था। इस बात को हिटलर के प्रचार मंत्रालय के प्रमुख गोबेल्स ने भाप लिया और हिटलर के प्रचार के लिए इसका इस्तेमाल करने का सोचा। बकायदा इस काम के लिए हिटलर से परमिशन ली गई होगी। 

         1939 के पहले रेडिओ काफी महंगा मिलता था। जिसके कारण आम जनता इसे खरीद नहीं सकती थी। सिर्फ अमीर लोगों के पास ही रेडिओ दिखाई देता था। जब ये बात गोबेल्स ने जान ली, तब उसे लगा की अगर हिटलर के प्रचार के लिए रेडिओ का इस्तेमाल करना है। तो जर्मनी के उन प्रत्येक आम नागरिक के पास भी रेडिओ होना चाहिए। इस कारण आम जनता के लिए रेडिओ सस्ते में उपलब्ध कराने के लिए  रेडिओ की किंमत कम से कम रखी गई। कीमत कम करने से पूरे जर्मनी में 90 लाख रेडिओ बेचे गए। 

         1939 तक जर्मनी में 70 फीसदी लोगों के घरों में रेडिओ उपलब्ध हो गए थे। सिर्फ लोगों के घरों में ही नहीं, रास्तो पर, पार्क में, होटलो मे, बार में, रेस्टोरेंट में, उन सभी सार्वजनिक जगहों पर रेडिओ लाउड स्पीकर लगा कर बजने लगे। इन सभी रेडिओ पर हिटलर के और जोसेफ गोबेल्स के भाषण और उनके विचार सुनाए जाते थे। इन सभी रेडिओ पर हिटलर की हमेशा वाहवाही की जाती थी। ज्यू लोगों के खिलाफ नफरत फैलाई जाती थी। ज्यू लोग कैसे देश के लिए घातक है? ये बताया जाता था। विरोधी पार्टीयों के नेताओं ने कैसे देश को बर्बाद किया? इस तरह का प्रचार इसके माध्यम से किया जाने लगा। इन रेडिओ के माध्यम से इस तरह से लोगों का ब्रेन वाश किया गया था कि, लोगों के जुबान पर केवल हिटलर का ही नाम आता था। लोग एकबार अपनो पर शक करते थे। पर हिटलर पर नहीं। इन रेडिओ के माध्यम से गोबेल्स ने लोगों का इस प्रकार से ब्रेन वाश किया की, लोगों के दिलों दिमाग मे केवल हिटलर ही बसने लगा। 

         रेडिओ पर हमेशा वस्तुस्थिति से अलग ही दिखाया जाता था। हमेशा भावना प्रधान भाषण लोगों को सुनाए जाते थे। विरोधक कैसे गलत है? उन्होंने कैसे गलत काम किये है? यही हमेशा लोगों को याद दिलाया जाता था। 

          देश के हर प्रश्न को ज्यू लोगों से जोड़कर, इन्हीं के वजह से ये सब हो रहा है। ऐसा बताया जाता था। नाझी पार्टी और हिटलर से बेहतर विकल्प देश में बिलकुल भी नहीं है। जो देश को आगे बढा सके। इस बात को बारबार दोहराया जाता था। 

          हिटलर अपने सत्ता के लिए राष्ट्र के प्रतिको का काफी यूज करता था। अपने विचारों को जनता पर थोपने के लिए और विरोधियों की आवाज दबाने के लिए हिटलर देश भर में बड़े बड़े इवेंट का आयोजन करता था। 

          इस तरह के प्रचार निती को जिसने जमीनी स्तर पर लागू किया। उसका नाम जोसेफ गोबेल्स है।


दुनिया भर में इस तरह के प्रचार नीति को “गोबेल्स निती” के नाम से जाना जाता है। 

       यह जानकारी आपको कैसी लगी हमें कंमेंट करके जरूर बताए। धन्यवाद!!!!! 

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