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जानिए सरकार क्यों नही छापती खूब सारे नोट और क्यों नहीं समाप्त कर देती देश की गरीबी

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      हर किसीके दिमाग में यह सवाल आता होगा की, देशमें काफी मात्रा में गरीबी और भुखमरी है। अपने देश में अमीर गरीब की बढ़ी खाई है। तो फिर सरकार अधिक मात्रा में नोट छापकर ये खाई कम या फिर समाप्त क्यो नहीं कर सकती? 🤔🤔🤔🤔🤔

          मतलब सभी देशवासियों को अदानी, अंबानी की तरह अमीर क्यो बना नही दिया जाता? इससे हमारे देश से गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी सब समाप्त हो जायेगी और हम दुनिया के सबसे अमीर देश भी बन जाएंगे। ना कोई भूखा मरेगा ना सोयेंगा। सब के पास पैसें होनेसे सभी देशवासी सुखी जीवन जियेंगे। पर सरकार ऐसा नहीं करती। आइए जानते हैं इसकी वजह क्या है।

                   हर देश में एक सरकारी सर्वोच्च बैंक होतीं हैं। जो देश के सभी बैंकों की बैंक होतीं हैं। वह बैंक सरकार की समन्वयक भी होतीं हैं। हमारे देश में वह बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) है। हमारे देश में RBI के पास ही नोट की छपाई का अधिकार है। RBI चाहे तो वो अतिरिक्त नोटा छापकर वह पैसा बाकी SBI, CBI जैसे बैंको के जरिये लोगोंमें वितरित करके देश की गरीबी दूर कर सकती हैं पर वह ऐसा नहीं कर सकती हैं।

                अगर RBI अधिक नोटा छापकर जनता मे वितरित करती हैं तो जनता के पास पैसा अधिक हो जायेगा। वह मनमर्जी अपनी जरूरते पुरा करने के लिए बेशुमार संपत्ति खर्च करेंगी। लोग बढ़ी मात्रा में मार्केट जाएंगे। अचानक जनता के पास पैसा आनेसे जनता की वस्तुए खरीदने की डिमांड बढ़ जायेगी। जिससे वस्तुओ की मार्केट मे आपूर्ति कम पड़ जाएँगी। और इस प्रकार के कारण वस्तुओकी किंमते बढ़ने लगेगी और इस वजह से देश में महंगाई बढ़ती जाएँगी। एक दिन वही महंगाई आसमान छूने लग जाएँगी।

             सभी देशवासियों के पास पैसा ज्यादा होने के कारण नोटों की किंमत कम होगी। इससे हमारा चलन डॉलर के मुकाबले में काफी कमजोर हो जाएँगा। जो डॉलर आज हम ६० से ७० रुपए में खरीदते हैं वह डॉलर खरीदने के लिए हमे लाखों खर्च करने पड़ सकते हैं। डॉलर अगर महंगा हो जाता हैं तो हमें विदेशी वस्तुए खरीदनेमे काफी पैसा खर्च करना पड सकता हैं। जैसे हम रक्षा हेतु उपयोग करने वाली रक्षा सामग्री, कारखानों की मशीनें इत्यादी। इन सभी बातों को देखते हुए अगर ऐसा होता है तो दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई वाला देश हमारा देश बन जाएंगा। महंगाई बढ़ जाने से हमारा देश आर्थिक रूप से भी काफी कमजोर हो जाएंगा। जो बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी और अपराध हमारे देश में अभी है वो और ज्यादा बढ़ जाएँगी।

             हम सोचते होंगे की क्यों न एकबार हम इसको अपनाकर देखे। दुनिया के कुछ देशों ने इसे अपनाकर देखा है। अपनी समस्याएं हल करके भी देखा है। पर उनकी समस्याएं कम या फिर नष्ट होंने की जगह वह और बढ़ गयी। दुनिया के उन देशो में वेनेजुएला, जिम्बाब्वे जैसे देश है। आइए जानते हैं ज्यादा नोटा छापकर जनता मे वितरित करने के कारण इन देशों में क्या हुआ था।

           आफ्रिका मे स्थित जिम्बाब्वे ने एक समय अपने देश मे समस्याओं को हल करने के लिए, देश के आर्थिक हालात सुधारने के लिए, अतिरिक्त नोट छापकर गलती की। जिससे वहा के नोटों की यानी चलन की किंमत इतनी गिर गयी थी और महंगाई इतनी बड़ी थी कि वहाँ के लोगों को ब्रेड और अंडे जैसी जरूरती समान खरीदने के लिए दुकानदार को थैले भर भरके पैसे देने पड़ते थे। नियम से ज्यादा नोटों की छपाई के कारण वहा एक अमेरिकी डॉलर २५,०००,०० (२५ milion) जिम्बोब्वे के बराबर हो गया था।

             इसी तरह का हाल दक्षिणी अमेरिकी देश वेनेजुएला का भी हुआ था। वेनेजुएलाने अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बढ़ी मात्रा में नोटों की छपाई की। जिस कारण वहा भी जिम्बाब्वे जैसे हालात बनें और देश को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। वेनेजुएला मे भी जरूरी चीजों के दाम आसमान छूने लगे थे। यहाँ तो जरूरी सामान की किंमते हर दिन डबल हो जाती थी। ब्रेड, दूध और एंडी जैसी जरूरतमंद चीजें खरीदने के लिए लोगों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे।

            वेनेजुएला मे महंगाई इतनी बड़ी मात्रा में बढ़ी थी कि वहा महंगाई एक करोड़ फीसदी हो गयी थी।

            इसलिए आरबीआई ढेर सारे नोट नही छापती। अगर RBI ऐसा कदम उठाती है तो हमारे देश के हालात भी जिम्बाब्वे और वेनेजुएला जैसे होंगें। इसलिए हमारी सरकार या फिर हमारी RBI भी ऐसा नही चाहेंगी की हम भी उन हालातो से गुजरे। हमें भी उन सभी परेशानियों का सामना करना पडे।

            RBI हमेशा अपने नियमो के मुताबिक और देश की परिस्थिती को देखते हुए नोट की छपाई करती हैं। RBI अपने मौद्रिक नीती (monetary policy) के अंतर्गत आनेवाली MSF, REPO, BANK, CRR, SLR इन पॉलिसी के अंतर्गत महंगाई नियंत्रित करती हैं। इन सभी पॉलिसी के रेट बढ़ाकर RBI महंगाई कम करती हैं। तो वही इन सभी पॉलिसी के रेट घटाकर महंगाई बढ़ा सकती हैं। RBI अक्सर बाजार की मंदी घटाने के लिए अपने इन सभी पॉलिसी के रेट घटाकर महंगाई के जरिये बाजार में तेजी लाती हैं।

          आशा करता हूँ ये लेख आपको सही जानकारी देने लायक होंगा।

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