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ब्रम्हा का एक दिन ८,३२०,०००,००० मानववर्ष

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         हिंदू धर्म में काफी रहस्यमयी बाते छिपी हुई है। इन रहस्यमयी बातों को सुलझाने का और समझने का प्रयास आज भी वर्तमान में दुनियाभर के विशेषज्ञ करते रहते है। हमें भी अपने हिंदू धर्म से जुड़ी जानकारी जानने में काफी अच्छा लगता है।

          आइए जानते है। सृष्टी के रचियता ब्रम्हाजी के आयु के बारे में।

          आधुनिक कालगणना के अनुसार हमारा एक वर्ष ३६५ दिनों का होता है। मगर हिंदू कालगणना के नुसार एक वर्ष ३६० दिनों का होता है। इसे हिंदू धर्म में मानव वर्ष भी कहा जाता है। समयानुसार इसमें बढ़त-घटत का बदलाव होता रहता हैं।

         हमारा एक वर्ष देवताओं और दैत्यों के एक दिन के समान होता है।

• मतलब १ मानव वर्ष = देवताओं का १ दिन।

     हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार देवताओं के एक वर्ष को एक “दिव्यवर्ष” कहा जाता है। देवताओं का एक दिव्यवर्ष मनुष्य के ३६० वर्षों के समान होता है।

• मतलब ३६० मानववर्ष = १ दिव्यवर्ष

    हिंदू धर्म के अनुसार मनुष्यों की आयु १०० वर्ष की मानी जाती है। और देवताओं की आयु समान्यत: १००० दिव्यवर्ष बताई गई है।

         हिंदू कालगणना के अनुसार, समय को चार युगों में विभाजित किया हुआ है।

• १) सतयुग २) त्रेतायुग ३) द्वापरयुग ४) कलियुग

    इन चार युगों में “सतयुग” सबसे बड़ा युग है। इस युग का पूर्णकाल ४८०० दिव्यवर्षों का है। अर्थात यह युग हमारे १,७२८,००० मानववर्ष के बराबर होता है।

• मतलब सतयुग:- ४८०० दिव्यवर्ष/ १,७२८,००० मानववर्ष

    सतयुग से १२०० दिव्यवर्ष छोटा ‘त्रेतायुग’ है। त्रेतायुग का पूर्णकाल ३६०० दिव्यवर्ष का होता है। अर्थात यह मनुष्य के १,२९६,००० मानव वर्षों के बराबर का है।

• त्रेतायुग:- ३६०० दिव्यवर्ष/ १,२९६,००० मानववर्ष

        त्रेतायुग से १२०० दिव्यवर्ष छोटा ‘द्वापरयुग’ होता है। द्वापरयुग का कार्यकाल २४०० दिव्यवर्ष का होता है। मतलब मनुष्य के ८६४,००० मानव वर्ष के बराबर होता है।

• द्वापरयुग:- २४०० दिव्यवर्ष/ ८६४,००० मानववर्ष

    इन चार युगों में सबसे छोटा युग ‘कलियुग‘ होता है। इस युग का समय काल १२०० दिव्यवर्ष का होता है। मतलब हमारे ४३२,००० मानववर्ष के बराबर होता है।

• कलियुग:- १२०० दिव्यवर्ष/ ४३२,००० मानववर्ष

    इन चारों युगों को मिलाकर जो युग बनता है, उसे “महायुग” कहते है। यह महायुग १२,००० दिव्यवर्षों का होता है। अर्थात यह मनुष्य के ४,३२०,००० मानव वर्ष का होता है।

• एक महायुग:- १२००० दिव्यवर्ष/ ४,३२०,००० मानववर्ष

    ७१ महायुगों को मिलाकर एक “मन्वंतर” बनता है। एक मन्वंतर में एक मनु शासक होता है। एक मन्वंतर ३०६,७२०,००० मानववर्ष का होता है।

• एक मन्वंतर:- ३०६,७२०,००० मानववर्ष

    एक कल्प १४ मन्वंतर के बराबर होता है। या फिर एक कल्प एक हजार महायुगों के बराबर होता है। ब्रम्हाजी का दिन एक कल्प के समान रूप होता है। उसी तरह रात्री भी एक कल्प की होती है। मतलब ब्रम्हाजी का पूर्ण एक दिन २ कल्पों का होता है। एक कल्प का पूर्णकाल मनुष्य के ४,३२०,०००,००० मानववर्ष के समान है।

• एक कल्प:- १४ मन्वंतर/ ४,३२०,०००,००० मानववर्ष

• ब्रम्हा का पूर्ण एक दिन:- २ कल्प/ ८,३२०,०००,००० मानववर्ष

    पुरानों के अनुसार एक कल्प के बाद पृथ्वी पर महाप्रलय आता है और पृथ्वी जलमग्न होती है।

         ब्रम्हाजी की आयु १०० वर्षों की होतीं हैं। ब्रम्हा के एक वर्ष को ब्रम्हा का “ब्रम्हवर्ष” कहा जाता है। एक ब्रम्हवर्ष ७२० कल्पों का होता है। मानव वर्ष के अनुसार एक ब्रम्हवर्ष ३,११०,४००,०००,००० वर्षों का होता है।

          ब्रम्हाजी की आयु को दो भागो में विभाजित किया जाता है। यह दोनों भाग ५०-५० वर्षों के होते हैं। जब ब्रम्हाजी का एक भाग अर्थात ब्रम्हाजी के जब ५० वर्ष पूरे होते है। तब उसे “परार्ध” कहा जाता है। एक परार्ध ३६,००० कल्पों का होता है। अर्थात १५५,५२०,०००,०००,००० मानव वर्षों का होता है।

• एक परार्ध:- १५५,५२०,०००,०००,००० मानववर्ष

    जब ब्रम्हा के १०० वर्ष पूरे होते है। तब उसे महाकल्प कहा जाता है। यह महाकल्प दो परार्ध का होता है। मतलब यह महाकल्प ७२,००० कल्पों का होता है। इस महाकल्प का कार्यकाल, मनुष्य के मानव वर्ष के अनुसार ३११,०४०,०००,०००,००० वर्षों का होता है। (३१ नील, १० खरब, ४० अरब मानववर्ष)

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          हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार जब ब्रम्हाजी के १०० वर्ष पूरे होते हैं। तब उनकी मृत्यु हो जाती है और ब्रम्हांड पूर्ण रूप से नष्ट हो जाता है। इस घटना को “प्राकृत प्रलय” के नाम से जाना जाता है। पुरानों के अनुसार यह घटना ब्रम्हा के १०० वर्ष पूरे होने पर घटित होती है।

 

  इस लेख में दी गई जानकारी में अगर कुछ त्रुटि नज़र आती है। तो उसके लिए हम क्षमा प्रार्थी है। हमारा मकसद किसी का दिल दुखाना या गलत जानकारी देना बिलकुल नहीं है

           Thank you for reading!!!

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