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अमूल (Amul) कंपनी success story।

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देश की जानिमानी डेयरी प्रोडक्ट कंपनी “Amul” के बारे में आज कौन नही जानता है। हम सभी ने कभी ना कभी तो अमूल का दूध या “अमूल मिल्क” या फिर अमूल के बाकी प्रोडक्ट जरूर खरीदे होंगे। आज जब भी कोई दूध पैकेट का नाम लेते है, तो हर किसी के जुबान पर अमूल दूध पैकेट का ही नाम खासकर आता है और आए भी क्यों ना हो। फेमस जो इतना है। लेकिन क्या आप जानते है कि, “Amul companyकी शुरुआत हुई कैसे| “Amul company” के मालिक कौन है और यह देश का नम्बर वन ब्रैंड कैसे बना|

आइए जानते है इस लेख में अमूल दूध कंपनी की सफलता की पूरी कहानी।

अमूल कंपनी का मालिक कौन है :-

Amul company owner| Amul कंपनी की नीव डॉ वर्गीस कुरियन और त्रिभुवनदास भाई पटेल ने मिलकर सन् 1946 मे गुजरात के आनंद गाव में रखी थी।


केरल के कोझीकोड मे एक संपन्न ईसाई परिवार में जन्मे डॉ वर्गीस कुरियन का जन्म सन् 26 नवंबर 1921 को हुआ था। डॉ वर्गीस कुरियन के पिता पेशे से एक सिविल सर्जन थे। तो वही उनकी माता एक उच्च शिक्षित महिला के साथ साथ एक खास पियानो वादक भी थी। डॉ वर्गीस कुरियन भी अपने माता-पिता की तरह ही एक उच्च शिक्षित व्यक्ती है। जिन्होंने मद्रास के लोयोला काॅलेज से भौतिकी में स्नातक की डिग्री हासिल की और मद्रास से ही बीई मेकॅनिकल किया। इसके अलावा उन्होंने विदेश में भी अमेरिका के मिशिगन यूनिवरसिटी से मेकॅनिकल इंजिनियरिंग मे मास्टर की की। इतनी सारी पढाई करने के बाद डॉ वर्गीस कुरियन को कोई भी अच्छी सैलरी वाला जॉब मिल जाता था। लेकिन उन्होंने कोई भी जॉब नही किया। उन्होंने अपना तकदीर बिजिनेस मे आजमाना चाहा और सफल भी हुए।

कैसे हुई अमूल की शुरुआत :-

गुजरात के अहमदाबाद शहर से लगभग 100 km के दूरी पर बसा “आणंद” एक छोटासा नगर है। अमूल दूध कंपनी के कारण मिली पहचान से, आज इस आणंद नगर को देश के दूध की राजधानी भी कहा जाता है। इसी नगर से डॉ वर्गीस कुरियन ने त्रिभुवनदास भाई पटेल के साथ मिलकर सन् 14 दिसंबर 1946 को अपने अमूल दूध नाम के कंपनी की शुरुआत की थी।

अमूल से पहले गुजरात में एक ही डेयरी हुआ करती थी। जिसका नाम है “पोलसन डेयरी”। इस डेयरी की स्थापना अमूल दूध डेयरी से लगभग 16 साल पहले सन् 1930 मे हुई थी। इतनी पुरानी डेयरी होने के बावजूद भी यह अमूल दूध डेयरी की तरह अपनी पहचान देशभर में नही बना पाई। यह डेयरी केवल गुजरात में ही अपना नाम कमा पाई।  इसका कारण है इस डेयरी का संचालन। कहा जाता है कि, पोलसन डेयरी केवल उच्चस्तरीय लोगों मे ही फेमस थी। इस डेयरी के सफल ना होने के पीछे की एक वजह यह बताई जाती है कि, यह डेयरी किसानों को उनके दूध को सही दाम नही देती थी। ज्यादा नफा कमाने के चक्कर में यह डेयरी किसानो का बड़ी मात्रा में शोषण किया करती थी।

विकिपिडिपिया मे दिये जानकारी के मुताबिक इस पोलसन डेयरी के विरोध में एक बार सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों के लिए आंदोलन भी किया था।

इस सारे घटनाक्रम के बाद ही अमूल दूध कंपनी की नीव रखी गई थी। शुरुआत में अमूल कंपनी बिना किसी नेटवर्क के और बिना किसी नियोजन के दूध का संकलन किया करती थी और वितरण किया करती थी। अमूल ने शुरुआत में केवल दो स्थानों से 250 लीटर दूध का संकलन और वितरण किया था। अमूल (कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ) एक भारतीय डेयरी सहकारी समिति है।

अमूल किस प्रकार से काम करती है :-

अमूल का काम करने का मॉडल काफी सिंपल नजर आता है। अमूल दूध के संकलन और वितरण को तीन चरणों में ही अपने करोडो ग्राहकों तक पहुचाती है। अमूल देश के लाखों गावों से दूध का संकलन करती है। गावो से दूध संकलन करने के लिए अमूल ने हर गाव में अपने सामूहिक को-ऑपरेटिव्ह संस्थानों का निर्माण किया हुआ है। जो गावों से रोजाना दूध का दो बार संकलन करते है। सारे गावों से दूध को दोबार इकट्ठा करने के बाद यह सारे को-ऑपरेटिव्ह संस्थान दूध को अतिशिग्र गति से जिला लेवल पर बने अमूल के दुग्ध भंडार तक पहुँचा देते है। इस स्थान पर दूध को खराब होने से बचाने के लिए उस पर कुछ प्रक्रिया की जाती है। जैसे कि, दूध को पर्याप्त शीत तापमान पर रखना। फिर इसके बाद दूध को उसके मांग के हिसाब से पैकिंग के लिए भेज दिया है और अंत में इस पैकिंग वाले दूध को ठोक विक्रेताओं तक पहुँचा दिया जाता है। जो इस दूध को ग्राहकों तक पहुचाने के लिए छोटे दुकानदारों मे वितरित करते है।

इस पूरे सप्लाई चैन का कृतिशील नियोजित आराखडा डॉ कुरियन और श्री भुवनदास जी ने बनाया हुआ है।

अमूल द्वारा सफल हुई दुग्ध क्रांती :-

साल 1964 में भारत के उस वक्त के पंतप्रधान लाल बहादुर शास्त्री, कैटल फिट प्लांट का उद्घाटन करने के लिए जब आणंद आए, तब कहा जाता है कि, वे एक दिन के लिए आणंद मे ही रुके थे। जब पंतप्रधान लाल बहादुर शास्त्री वहा रुके, तब वे amul के संस्थापक डॉ वर्गीस कुरियन से मिले और उन्होंने बाकी को-ऑपरेटिव्ह की तरह ही अमूल का भी जायजा लिया था। उन्होंने देखा कि, जहाँ amul किसानों से दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है, वही amul लोगों रोजगार देने के साथ साथ किसानो के आर्थिक हालातों में भी सुधार ला रहा है।

अमूल के प्लान से प्रभावित हुए पंतप्रधान लाल बहादुर शास्त्री जब दूसरे दिन दिल्ली आए, तब उन्होंने दिल्ली आने के बाद अमूल के संस्थापक डॉ कुरियन को सूचित किया कि, वे अमूल के प्रतिरूप को गुजरात के बाहर पूरे देश में फैलाए। ताकि भारत दूध के मामले में पूरी दुनिया में आत्मनिर्भर बने।

भारत को दूध के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बाद में पंतप्रधान लाल बहादुर शास्त्री जी ने अगले ही साल यानी 1965 मे देश में राष्ट्रीय स्तर पर एक बोर्ड की स्थापना की। जिसका नाम था “राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड“। इस बोर्ड के तहत देश में दुग्ध क्रांति की नीव रखी गई थी। इस क्रांती को सफल बनाने के लिए बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर डॉ वर्गीस कुरियन को चुना गया था। डॉ वर्गीस कुरियन इस पद पर 1965 से लेकर 1998 तक बने हुए थे। भारत में दुग्ध क्रांती को सफल बनाने के पीछे इन्ही का ही हाथ है।

विकिपिडिया मे मिले जानकारी के अनुसार, भारत में दुग्ध क्रांती को सफल बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में धन की आवश्यकता थी। इसके लिए डॉ वर्गीस कुरियन ने वर्ल्ड बैंक का दरवाजा खटखटाया। डॉ वर्गीस कुरियन दुग्ध क्रांती के लिए बिना किसी शर्त के वर्ल्ड बैंक से उधार धन राशी प्राप्त करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने वर्ल्ड बैंक को मनाने की बहुत कोशिश की। पर डॉ वर्गीस कुरियन शुरुआत मे सफल नहीं हो सके।

लेकिन जब वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष साल 1965 के अंत में भारत दर्शन पर आए थे, तब डॉ वर्गीस कुरियन ने उनसे मुलाकात की और भारत में दुग्ध क्रांती को सफल बनाने में वे अपना योगदान कैसे दे सकते है। यह उन्हे उन्होंने समझाया। मुलाकात मे डॉ वर्गीस कुरियन ने उन्हे कहा कि, “आप मुझे धन दीजिए और फिर उसके बारे में भूल जाइए।” भारत दर्शन करके वापस लौटने के बाद वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष ने डॉ वर्गीस कुरियन पर भरोसा करके भारत को दुग्ध क्रांती को सफल बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक से ऋण की स्वीकृती दी। इस प्रकार से प्राप्त धन की मदत से डॉ वर्गीस कुरियन ने भारत में दुग्ध क्रांती को सफल बनाकर दिखाया।

डॉ वर्गीस कुरियन के बदोलत इस दुग्ध क्रांती द्वारा लगभग 0.1 करोड़ को-ऑपरेटिव्ह संस्थाए एवम 5 लाख से ज्यादा दुग्ध उत्पादक जोड़े गए।

बोर्ड का अध्यक्ष बनने से ना केवल बाकी को-ऑपरेटिव्ह संस्थाओ का और दुग्ध उत्पादकों का फायदा हुआ बल्कि उनकी कंपनी अमूल को भी काफी फायदा हुआ। केवल 250 लीटर दूध के संकलन से शुरू किए अपने अमूल का सफर आज 33 लाख लीटर तक पहुँचा है। आज वर्तमान में अमूल के करीब 8 लाख मेंबर है। जो रोजाना लगभग 33 लाख लीटर दूध का संकलन और वितरण करते है। आज वर्तमान में अमूल कंपनी की 50 लाख लीटर दूध को हैंडल करने की क्षमता है। आपको बता दे कि, दुग्ध उत्पादन में अमूल कंपनी का पूरी दुनिया में 1.2 प्रतिशत हिस्सा है।

अमूल बटर विज्ञापन :-

Amul butter|अमूल दूध से शुरू किए अपने सफर के बाद अमूल ने सन् 1956 मे अमूल बटर को भी भारतीय बाजार में उतारा। शुरुआती दौर में अमूल बटर को देश की कई सारी कंपनियां टक्कर दे रही थी। इन कंपनियों मे सबसे ज्यादा टक्कर देने वाली कंपनी थी पॉल्सन गर्ल।

जानकारी के मुताबिक अपने अमूल बटर को प्रोमोट करने के लिए और पॉल्सन गर्ल कंपनी को टक्कर देने के लिए अमूल ने एक अनोखा विज्ञापन चलाया। अमूल ने अपना विज्ञापन इस प्रकार से विज्ञापन कंपनी से बनवाया, जो खासकर महिलाओ का ध्यान आकर्षित करे।

बस फिर क्या था महिलाओ को पसंद आने वाला विज्ञापन अमूल ने इस कदर चलाया कि, भारतीय बाजार में अमूल बटर की डिमांड तेजी से बढ़ी। जिसका पुरा फायदा अमूल कंपनी ने उठाया।

आपको बता दे कि, विज्ञापन में दिखने वाली अमूल गर्ल लोगों को, खासकर महिलाओ को सबसे ज्यादा पसंद आई।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नाम :-

अमूल दूध कंपनी का Utterly Butterly Compain वाला ऐड दुनिया में सबसे ज्यादा चलने वाला अमूल का ऐड है। अमूल का यह विज्ञापन इस कदर चला कि, इस विज्ञापन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में जगह मिली। इस विज्ञापन के बारे में अमूल कंपनी का कहना है कि, वह एक बहुत सीधी, आसान और अपने ग्राहकों के प्रति नम्र और एकसा उत्पाद प्रदान करने वाली कंपनी है।

आपको बता दें कि, अमूल के विज्ञापन में कभी भी किसी भी बड़े सेलिब्रिटी को नहीं लिया जाता है और न ही उनके द्वारा प्रोडक्ट को प्रमोट किया जाता है। अमूल कंपनी की सफलता उसकी सोच, मार्केटिंग रणनीती, सस्ता प्रोडक्ट और उनकी क्वालिटी का नतीजा है। अमूल कंपनी का कहना है कि, उसने लोगों को यह विश्वास दिलाया है कि, अगर वे अपने घर पर भी दूध से मक्खन बनाएंगे तब भी वे अमूल के इतना सस्ता नहीं बनेगा। कंपनी का कहना है कि, उसने लोगों को यह भरोसा दिलाया है कि, उसके द्वारा निर्मित सभी प्रोडक्ट अच्छी क्वालिटी के और किसानों के घर से निकलकर आपके घर तक पहुंचे हैं। हमारे प्रोडक्ट में कुछ भी मिलावट नही पाई जाती है।

अमूल प्रोडक्ट लिस्ट :-

Amul product list| Amul all product list| अमूल के अमूल दूध के अलावा कई सारे प्रॉडक्ट मार्केट में आते है।

  1. अमूल दूध
  2. पाउच मिल्क
  3. बेड स्प्रेड
  4. चीज
  5. बेवरेज
  6. आइस क्रीम
  7. पनीर
  8. दही
  9. घी
  10. मिल्क पाउडर
  11. चॉकलेट्स
  12. फ्रेश क्रीम

इस प्रकार के कई सारे प्रॉडक्ट अमूल कंपनी बनाती है।

देश की प्रमुख मार्केट लीडर कंपनी:-

अमूल|Amul company share|

अमूल कंपनी देश की प्रमुख मार्केट लीडर कंपनी मानी जाती हैं। खास तौर पर अमूल बटर देश देश में मार्केट लीडर है। अमूल के पास इस प्रॉडक्ट का मार्केट के कुल शेयर का 85 फीसदी हिस्सा है। तो वही दूध के मामले में कंपनी के पास 25 फीसदी हिस्सा है। इसके अलावा पनीर के मामले में 80 फीसदी मार्केट पर अकेले अमूल कंपनी का दबदबा है। आपको बता दें कि, आइस क्रीम के मामले में भी अमूल कंपनी कुछ पीछे नहीं है। आइस क्रीम मार्केट का 40 फीसद हिस्सा इसके पास ही है।

अमूल कंपनी की सालाना कमाई :-

अमूल का साल का टर्नओवर, यानी साल की आमदनी पर हम नजर डाले तो, यह साल दर साल लगातार बढ़ते ही हमे दिखाई देगी। आपको बता दें कि, अमूल की साल 2016 में कुल आमदनी 11,668 करोड़ रुपए थी। जो साल 2017 में बढ़कर 20,733 करोड़ पर जा पहुंची। साल 2018 में यह आमदनी 29,225 करोड़ रुपए और साल 2019 में यह 32,960 करोड़ रुपए जा पहुंची। अभी 2020 में जहा कोविड बीमारी के चलते और सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाने के चलते पूरे देश के सभी कंपनीयो की आमदनी घटी है। लेकिन अमूल कंपनी की आमदनी इस समय भी बढ़ी हुई नजर आती है। टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के मुताबिक अमूल कंपनी की आमदनी साल 2020 में 39,200 करोड़ रुपए थी।

अमूल कंपनी का मुनाफा :-

अमूल एक सहकारी संस्था होने के कारण कंपनी में मुनाफे को सामने रखकर काम नहीं किया जाता है। लेकिन फिर भी कंपनी ने साल 2018 में 49 करोड़ रुपए मुनाफा कमाया था। तो वही साल 2019 में यह बढ़कर 53 करोड़ रुपए हुआ।

यह थी अमूल दूध कम्पनी की सक्सेस स्टोरी। कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताएं।

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