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आतंकी कसाब को इस लड़की ने पहचाना था अदालत में, जिससे वह पहुंचा फांसी के फंदे तक

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यह फोटो  देविका रोटावन के facebook account से लिया गया है।

देविका रोटावन कौन है|devika Rotawan in hindi|

यह कहानी है एक नौ साल के लड़की की। जिसने मुंबई हमले के आतंकी अजमल कसाब के विरोध में गवाही देकर उसे फासी के फंदे तक पहुंचाया था।

दोस्तों यह घटना बिलकुल सच है। जिस लड़की ने अजमल कसाब की कोर्ट में पहचान की और उसे फांसी दिलवाई। उस निडर और बहादुर लड़की का नाम देविका रोटावन हैं।

देविका रोटावन 2008 में हुए मुंबई हमले की एक प्रमुख और सबसे कम उम्र की गवाह हैं। जिसने हमले के दौरान जिंदा पकड़े गए अजमल कसाब को अपनी आंखों से अंधाधुंध गोलीबारी करते हुए देखा था।

जब अजमल कसाब और उसके बाकी साथियों ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मीनस के स्टेशन पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, तब देविका रोटावन उसी स्टेशन पर मौजूद थीं। इस गोलीबारी में खुद देविका रोटावन भी घायल हुई थी।

आइए जानते हैं इस लेख में इस बहादुर लड़की की संघर्षमय कहानी। जिसने कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में देश की मदद की थी।

देविका रोटावन का परिचय  :-

विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, देविका रोटावन का जन्म 27 दिसंबर 1998 को राजस्थान के समीरपुर गांव में हुआ। देविका रोटावन के परिवार में उनके अलावा उनके पिता और दो भाई है। उनके पिता का नाम नटवरलाल रोटावन हैं और उनके मां का नाम सारिका है। जानकारी के मुताबिक उनके मां का निधन 2006 मे ही हुआ। तब वह केवल 7 साल की थी। उनका और उनके दोनों भाईयों का लालन पालन उनके पिता ने ही किया।

26/11 मुंबई हमले के दिन :-

देविका रोटावन ने Red FM India पर दिए अपने मुलाकात में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होने कहा कि, 26/11/2008 को जब यह घटना घटी, तब उसकी उम्र 9 साल 11 महीने की थी। उस दिन जब यह वाकया हुआ,  उस वक्त वह और उनके पिता और भाई पूना जाने के लिए बांद्रा से सीएसटी स्टेशन गए थे। वहा स्टेशन पर देविका रोटावन और उनके पिता और भाई ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उसी दौरान उनके भाई को टॉयलेट आया और वह उनसे बोलकर टॉयलेट के लिए चला गया। जब वह टॉयलेट के लिए गया, देविका के पिता उन्हें कहकर टिकट निकलने गए।

देविका आगे बताती है कि, जब उनका भाई टॉयलेट के लिए गया, तभी अचानक से बम धमाका हुआ और फायरिंग शुरू हुई। देविका बताती है कि, शुरुआत में उन्हे लगा कि, शायद कोई तो भी वहा फटाके फोड़ रहा है। उनका कहना है कि, क्युकी फायरिंग की आवाज बिलकुल फटाखे जैसी ही थी। लेकिन फायरिंग होते देख लोगो ने अचानक से दौड़ना शुरू किया था। उन्हे बिलकुल भी समझ नहीं आ रहा था कि, आखिर हो क्या रहा है। तभी उन्होने कसाब को गन से फायरिंग करते हुए देखा। फायरिंग होते देख उनके पिता उनके पास आए और वे दोनो वहा से दौड़ने लगे। उनका भाई भी उधर के उधर भाग निकला। इधर से देविका और उनके पिता भागने लगे। लेकीन तभी अचानक से कसाब की एक गोली उनके राइट पैर में आ के लगी और वह वही गिर पड़ी और बेहोश हुई। लेकीन बेहोश होने से पहले देविका ने उस आतंकवादी का चेहरा देख लिया था।

देविका आगे Red FM India पर बताती है कि, उसके बाद उसे कुछ भी मालूम नहीं है कि, आगे क्या हुआ? जब उसकी आंखे खुली, तब वह अस्पताल में भर्ती थी। जहा उनके पैर से गोली निकाली जा रही थी।

देविका बताती है कि, संजीवनी हॉस्पिटल में मे उनपर इलाज करने के बाद उन्हें मुंबई के ही जेजे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहा उनपर छह बार सर्जरी की गई। उन्हे अस्पताल में इलाज के लिए डेढ़ महीना भर्ती रहना पड़ा। इस डेढ़ महीने के दौरान उनका पैर बिलकुल भी काम नहीं कर रहा था।

जब डेढ़ महीने बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज मिला, तब वह अपने पिता और भाई के साथ अपने गांव समीरपुर चली गई और वही स्थायिक हुई। इधर मुंबई में जिंदा पकड़े गए अजमल कसाब पर कोर्ट ट्रायल चल रहे थे।

गांव में स्थायीक होने के कुछ महीने बाद मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने उनके चाची को फोन किया और पूछा कि, क्या उन्हे देविका के पिता का फोन नंबर मिल सकता है।

देविका  Red FM India पर बताती है कि, उसके बाद मुंबई पुलिस ने उनके पिता से फोन पर बात की और पूछा कि, क्या आप अजमल कसाब के खिलाफ कोर्ट में गवाही दोगे। क्युकी आपके बेटी ने अजमल कसाब को देखा हुआ है। इसपर देविका के पिता उन्हें हा कहा था। जिसके बाद उन्हें गवाही देने के लिए वापस मुंबई आना पड़ा।

देविका रोटावन बताती है कि, जिस अजमल कसाब को पुलिस ने जिंदा पकड़ा था उसे उसने खुद अपनी आंखों से लोगों पर गोलियां चलाते हुए देखा था और उनके पिता ने बाकी और दो आतंकियों को देखा था। जिन्हे पुलिस ने मौत के घाट उतारा था। लेकीन अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था।

आपको बता दें कि, अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने से लोग डर रहे थे। कोई भी गवाही देने के लिए आगे नहीं आ रहा था। लेकीन नौ दस साल की देविका रोटावन और उनके पिता अपनी बहादुरी दिखाते हुए उस वक्त आगे आए और देश की मदद की।

इसके बाद देविका ने कोर्ट में क्या हुआ इस बारे में भी Red FM India पर बताया। उन्होने कहा कि, जब वह 10 जून को कोर्ट में खड़ी हुई, तब उसके सामने कोर्ट के बड़े जज बैठे हुए थे। बाजू में कई सारे वकील खड़े थे। मीडिया थी, कई सारे पुलिस के आला अफसर और बाकी जवान वहा मौजूद थे और कटघरे में तीन लोग खड़े थे।

देविका कोर्ट ट्रायल का जिक्र करते हुए बताती है कि, सबसे पहले जज साहब ने उनसे पूछा कि, क्या आपको कसम का मतलब पता है। तब देविका ने कोर्ट को बताया कि, हा! देविका ने इस बारे में बताया था कि, “अगर मैं सच बोलूंगी तो भगवान मेरा साथ देंगे और अगर मैं झूठ बोलूंगी तो, भगवान मुझे सजा देंगे।” इसके बाद कोर्ट ने देविका को पूछा कि, उस समय स्टेशन पर क्या हुआ था?

कोर्ट के इस सवाल के जवाब में देविका ने स्टेशन पर क्या हुआ था। उस बारे में पूरा कोर्ट को बताया। इसके बाद जज साहब ने उनसे पूछा कि, क्या आप इसमें से उस आतंकवादी को पहचान सकते हो? जिसने यह सब किया। इसके बाद देविका के सामने उस वक्त तीन लोग खड़े थे। देविका ने अजमल कसाब की सही पहचान करके के कोर्ट को बताया।

देविका रोटावन द्वारा आतंकी अजमल कसाब की पहचान करने के बाद कोर्ट ने अपनी सभी कार्यवाई पूरी की और अंत में कसाब को फांसी शिक्षा सुनाई।

देविका रोटावन द्वारा गवाही देने के बाद देविका रातोरात पूरी दुनिया में फेमस हुई। दुनियां भर के मिडिया ने, लोगों ने और बाकी संस्थानों और देशों ने उसके बहादूरी की सराहना की। इस घटना के बाद दस बारा साल की देविका को हर कोई जानने लगा था। लेकीन देविका का गवाही देना, उसके जीवन में कई सारी परेशानियां लेके आया।

गवाही देने के बाद, देविका को कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। देविका रोटावन इस बारे में विस्तार से बताती है कि, उन्हे गवाही देने से रोकने के लिए उन्हें काफी परेशान किया गया।

धमकियां मिली:-

देविका बताती है कि, उन्हे अनजान नम्बर फोन आते थे और जबान पलटने के लिए उन्हें अलग अलग ऑफर दिया करते थे और ऐसा ना करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी तक देते थे। वह कहती है कि, इस बारे में उन्होन पुलिस मे भी कंप्लेंट की, लेकीन कुछ भी नहीं हुआ।

इस बारे देविका के पिता बताते हैं कि, गवाही ना देने पर उन्हें दबाव और ऑफर दोनों मिले। बहोत ऐसे अनजान नम्बर से फोन आए और गवाही ना देने पर उन्हें कई सारे ऑफर दिए गए। ऐसा ना करने पर उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी गई। लेकीन उन्होने इन सब को ठुकरा दिया और देश हित को सर्वोपरी समझा।

लाख धमकियों के बावजूद भी कोर्ट में गवाही देने के बाद एक तरफ देविका की तारीफ हो रही थी। तो वही दूसरी ओर समाज उनसे मुंह फेर रहा था। देविका बताती हैं कि,

गांववालों ने भी साथ छोड़ा :-

26/11 हमले के आतंकी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने से देविका रोटावन को और उनके परिवार को गाववालों ने जैसे बहिष्कृत कर दिया था। गांव में लोग उनसे डरते थे। दूरियां बनाकर रहते थे। उन्हे किसी भी समारोह में शामिल होने से रोकते थे। डर के मारे गांव में कोई भी उन्हें काम पर नही आने देता था। किराना दुकानदार उन्हे किराना नही देता था। गांववाले देविका को गांव में रहने के लिए मना करते थे। इस बारे गांववालों का कहना है कि, कही देविका के कारण उन सब की जान खतरे में ना पड़ जाए। गांव वालों को लगता था कि, अगर देविका गांव में रहने लगीं, तो आतंकवादी गांव में भी जरूर आएंगे और देविका के कारण उन्हे भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।

यह सब बताते हुए देविका कहती हैं कि, आखिर उन्होनें ऐसी क्या गलती की थी कि, गांववाले उनकी तारीफ करने के बजाय उन्होने उनका तिरस्कार किया। गांववालों के इस हरकत के कारण देविका काफी आहात हुई थी। आखिर कार उन्होने और उनके परिवार ने अपना गांव छोड़ा और वे सब मुम्बई मे आकर बस गए।

मुंबई में भी देविका को कई परेशानियां झेलनी पड़ी :-

मुंबई में हुई परेशानियों का जिक्र करते हुए देविका बताती है कि, जब गांववालों ने डर के कारण उनका बहिष्कार किया तो वह और उसका परिवार मुंबई में आ कर बस गया। लेकीन यहां भी उन्हें कई परेशानियां झेलनी पड़ी। देविका ने इस बारे में बताया कि, उन्हे मुंबई कोई भी भाड़े से घर नही दे रहा था। सब यही कहते थे कि, “जब आपके बारे में आतंकियों पता चला, तो उनके साथ साथ उनके परिवार को भी समस्या होगी”। इतना ही नहीं देवीका के पिता को भी काम देने से लोग कतराते थे। क्युकी सभी लोग हमें पहचानते थे। की हां! ये तो वही परिवार है जिसको हमने टीवी पर देखा था। जिन्होंने अजमल कसाब के खिलाफ गवाही दी थी।

रिश्तेदारों ने भी साथ छोड़ा :-

26/11 हमले के आतंकी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने के बाद रिश्तेदारों ने भी उनसे दूरियां बनाई। वे भी डरते थे। कही उनकी जान भी ना खतरे में पड़ जाए। देविका के रिश्तेदारों मे अगर कोई शादी समारोह रहता था। तो वह देविका के परिवार को निमंत्रण देने से भी खौफ खाते थे। इतना ही नहीं वे देविका के परिवार का नाम पत्रिका में छापने से भी डरते थे।

स्कूल में दाखिला नहीं मिलता था:-

देविका बताती है कि, कसाब के खिलाफ गवाही देने के बाद उन्हें स्कूल में दाखिला लेने मे काफी दिक्कते हुई। अपना अनुभव साझा करते हुए देविका बताती है कि, जब वह स्कूल में दाखिला लेने जाती थी, तो स्कूल का प्रशासन उसे “एडमिशन सीट फुल हुई है इसलिए आपको दाखिला नहीं मिल सकता” ऐसा कहते थे। तो वही एक स्कूल ने उन्हें यह कहकर दाखिला नहीं दिया कि, “उन्हें अंग्रेजी अच्छे से नही आती है”। देविका बताती हैं कि, स्कूल प्रशासन के यह सब बहाने थे। वे डरते थे। कही मेरे वजह से उनकी जान ना खतरे में पड़ जाए।

देविका रोटावन के बारे में पत्रिका न्यूज ने यह भी बताया कि, उन्हे दाखिला दिलाने में एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने काफ़ी मदद की। उन्ही के वजह से उन्हें स्कूल में दाखिला मिला ऐसा बताया जाता है।

कसाब की बेटी कहकर चिढ़ाते थे बच्चे:-

देविका रोटावन ने यह भी बताया है कि, जब वह इस सारे घटनाक्रम के बाद स्कूल जाने लगीं, तब स्कूल के बच्चे उसे “कसाब की बेटी” कहते थे। देविका कहती है कि, उसे इसकी उम्मीद भी नहीं थी कि, स्कूल में उसे यह सब भी सुनना पड़ेगा। वे कहती हैं कि, स्कूल में उससे बाकी बच्चे काफी डरते थे। कोई भी उनसे दोस्ती नहीं करना चाहता था। हर कोई उनसे दूरियां बनाकर रहते थे। स्कूल में उनके पास बैठने मे हिचकिचाते थे। बच्चे उनसे बात तक नहीं करते थे। देविका स्कूल के उन पलों का जिक्र करते हुए आगे बताती है कि, उनके जो सहपाठी थे। वो भी इस घटना के बाद उनके साथ रहने मे मना करने लगे थे।

जब यह सारा घटनाक्रम उनके साथ हो रहा था। तब स्कूल प्रशासन ने भी इसपे कोई ध्यान नहीं दिया। वह कहती हैं कि, वह बहुत बार स्कूल से रोते हुए अपने घर गई है। क्युकी स्कूल में उन्हे इस तरह से परेशान किया जाता था।

स्कूल में होने वाली इन परेशानियों के कारण उन्होनें बीच में स्कूल मे जाना भी बंद कर दिया था। बाद मे उनके परिवार ने उनका दाखिला दूसरे स्कूल में किया। लेकीन वहा भी उनके इन परेशानियों में कोई कमी नहीं आई। वहा भी उन्हें इन परेशानियों को झेलना पड़ा।

लेकीन इन सारी परेशानियों के बावजूद भी देविका रोटावन ने अपनी शिक्षा पूरी की। देविका ने आईईएस न्यू इंग्लिश हाई स्कूल (बांद्रा) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और सिद्धार्थ कॉलेज (चर्चगेट), चेतना कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

केबीसी का ऑफर छोड़ा :-

देविका रोटावन ने इस बात का भी जिक्र किया है कि, कौन बनेगा करोड़पति के शूटिंग के लिए उन्हें 12 दिसंबर 2012 को बुलाया गया था। लेकीन उसी दिन पर उन्हें एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने भी एक प्रोग्राम के लिए उन्हें आमंत्रित किया था। जहा हजारों की संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए आने वाले थे। आपको बता दें कि, एबीवीपी यह वही संघटन है। जिसने देविका रोटावन को स्कूल में दाखिला मिलने के लिए प्रयास किए थे। इस बारे में देविका ने कहा है कि, “मैने केबीसी का ऑफर छोड़ एबीवीपी के कार्यक्रम में भाग लेना इसलिए मुनासिफ समझा। क्युकी वहा मुझे सुनने के लिए हजारों लोग आने वाले थे और दूसरी बात यह थी कि, जब मुझे स्कूल में दाखिला नहीं मिल रहा था, तब एबीवीपी ने मुझे काफ़ी सपोर्ट किया था।”

भूल गई सरकार अपने वादे :-

अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने के बाद, तब सरकार, विभागों, आला अफसरो और देशभर की कई सस्थानों ने उन्हें कई वादे किए थे। उस वक्त सरकार ने उन्हें घर देने से लेकर उनकी शिक्षा और हर तरह की, हर समय मदद करने के वादे किए थे। लेकीन सरकार ने उन वादों को अभितक पूरा नहीं किया।

देविका बताती है कि, उन्हे सरकार और कुछ संस्थानों की तरफ से कुछ वित्तीय सहायता मिली जो उनके और उनके भाई के इलाज में खर्च हुई।

देविका बताती है कि, महाराष्ट्र के फडणवीस सरकार के समय उन्हे दस लाख मिले थे। लेकीन उस दस लाख की मदद के लिए उन्हें सरकार ने काफ़ी घुमाया। लेकीन फिर भी वह उस मदद के लिए सरकार का शुक्रिया करती है। क्योंकि उसी मदद पर उनका टीबी का इलाज हो चुका था। जो लास्ट स्टेज में पहुंच चुका था।

देविका फडणवीस सरकार के उस मदद को लेकर कहती हैं कि, अगर उन्हें वह मदद वक्त पर नही मिलती। तो शायद वह आज इस दुनिया को अलविदा कह चुकी होती।

देविका आज भी भाड़े के घर में रहती हैं सरकार ने उन्हें आज तक घर नहीं दिया है। देविका कहती हैं कि, लोकडाउन के कारण उनके पास कोई काम नहीं है और वह घर भाड़ा देने मे असमर्थ है।

सरकार से मदद ना मिलने के कारण और अपने वादे पूरे ना करने के कारण अब देविका ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

जब उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर मीडिया में खबर छपी। तब मुंबई से कांग्रेस के विधायक जीशान सिद्दीकी उन्हे मिलने पहुंचे और उन्होंने देविका को एक राशि का चेक दिया और देविका को कहा कि, वे ठाकरे सरकार से निवेदन करेंगे कि, वे उन्हे जल्द ही खुद का घर मुवैया करे।

देविका को उनकी सुरक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे गए थे। जिसके जवाब में देविका ने बताया था कि, उन्हे किसी भी प्रकार भी पुख्ता सुरक्षा नही मिली हुई है। लेकीन पुलिस के आला अफसर कहते हैं कि, वे उनके और उनके परिवार के सुरक्षा को लेकर गंभीर है। किसी भी समारोह के लिए जब उन्हें आमंत्रित किया जाता है, तब निमंत्रण पत्र समेत आयोजको पर भी उनकी नजर हमेशा बनी रहती है।

देविका को मिले सम्मान और पुरस्कार :-

2009 में, उन्हें एक एनजीओ के एक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें बनवारी लाल जोशी से राजस्थान में नागरिक रतन पुरस्कार भी मिला । 2014 में, उन्हें महिला अचीवर्स पुरस्कार, राजस्थान गौरव पुरस्कार, तपोवन ट्रस्ट से श्री गंगानगर राजस्थान पुरस्कार और अजीत पवार और शरद पवार से बारामती पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

IPS अफसर बनना चाहती है देविका रोटावन :-

देविका रोटावन को जब अपने करियर के बारे में पूछा गया, तब देविका ने बताया कि, वह आगे चलकर आईपीएस अफसर बनना चाहती हैं और देश से आतंकवाद को खत्म करना चाहती है।

स्त्रोत :

Devika Rotawan (https://en.m.wikipedia.org/)

26/11 उत्तरजीवी देविका रोटावन ने मलिष्का से बात की (Red FM India, YouTube, November 26, 2018)

रायपुर की मिट्टी से जुड़ी हैं कसाब के खिलाफ गवाही देने वाली देविका की जड़ें   (Patrika, May 07, 2018)

26/11 हल्ला : कसाबविरोधात साक्ष दिली म्हणून कुटुंबाला टाकलं वाळीत  (लोकमत, November 26, 2017)

26/11 मुंबई हमला: 9 साल की देविका को लगी थी गोली, लोग कहते थे ‘कसाब की बेटी’ (अमर उजाला, 25 Nov 2018)

26/11 मुंबई हमलों की गवाह देविका का दर्द- ‘दुनिया क्यों कहती है हमें कसाब की बेटी?’ (नवभारत टाइम्स, Nov 27, 2018)

सरकार से क्यों नाराज 26/11 मुंबई हमले की चश्मदीद गवाह? (नवभारत टाइम्स, 26 Aug 2020)

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