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अर्थिंग के बारे में आप जानते ही होंगे। पर क्या आप जानते हैं अर्थिंग क्या होती हैं? (What is earthing in hindi) अर्थिंग क्यों जरुरी है (earthing kyun jaruri hai) और अर्थिंग के कितने प्रकार होते हैं।

अर्थिंग (earthing)
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अगर आप इलेक्ट्रिकल से संबंधित पढ़ाई कर रहे हैं, तो आप ने अर्थिग के बारे में जरूर सुना होगा, पर अगर आपको नहीं पता कि अर्थिंग क्या है ( what is earthing in hindi) और यह हमारे लिए क्यों जरूरी है। तथा अर्थिंग के कितने प्रकार होते हैं। तो चलिए जानते हैं,  यह सब जानकारी हम इस लेख में।

अर्थिंग क्या होती हैं? (What is earthing in hindi/earthing meaning in hindi)

अर्थिंग क्या होती हैं? (Earthing kya hoti hai) या अर्थिंग किसे कहते है? आपको बता दें कि, जब हम जमीन या धरती के अंदर 2.5 से 3 मीटर का गड्ढा करके जब हम उसमे कॉपर या आयर्न का पाइप या प्लेट गाडगे, उसका कंडक्टर बाहर निकालकर रखते हैं। इस पूरे सिस्टम को ही अर्थिंग कहते है। आसान भाषा में समझे तो, इलेक्ट्रिक उपकरण को धरती के साथ कनेक्ट करने के तरीके को अर्थिंग कहते है।

अर्थात बिजली से चलने वाले उपकरण का संबंध धरती के साथ स्थापित करना, अर्थिंग कहलाता हैं या अर्थिंग होती हैं। अब आप समझ गए होगे कि, अर्थिंग क्या होती हैं (Earthing kya hoti hai) या अर्थिंग किसे कहते है? अब जानते आख़िर इसे करते क्यों है। आइए जानते हैं।

अर्थिंग क्यों जरुरी है (earthing kyun jaruri hai)

पहले हम यह जान गए हैं कि, अर्थिंग क्या होती हैं (Earthing kya hoti hai) या अर्थिंग किसे कहते है? पर यह क्यों जरुरी है? यदि हम अर्थिंग नही करते हैं, तो क्या होगा?

आपको बता दें कि, भारतीय विद्युत निगम 1956 के मुताबिक़ इलेक्ट्रिक स्थापन में हर इलेक्ट्रिक उपकरण को अर्थिंग जोड़ना अनिवार्य है। ऐसा इसलिए अनिवार्य किया गया है, ताकी शॉक सर्किट से होने वाले हादसों से बचा जा सके।

निम्न कारणों के चलते अर्थिंग जरुरी है।

1) मनुष्य बिजली के झटके से बच सके।

2) बिजली उपकरण शॉक सर्किट होने से बच सके।

3) मनुष्य द्वारा निर्मित बिजली हो या आकाश से गिरने वाली बिजली हो इनसे बड़ी बड़ी मशीनें यहां तक बिल्डिंग, घर और ख़ासकर लोग सुरक्षित रह सके इसके लिए अर्थिंग जरुरी है।

4) इसके अलावा बिजली उपकरणों में बिजली की सप्लाई स्थिर रह सके इसके लिए भी अर्थिंग जरुरी है। इस प्रकार से कई कारणों के लिए अर्थिंग (earthing) जरुरी है।

अर्थिंग कितने प्रकार की होती हैं (type of earthing)

वर्तमान में बिजली को लेकर कई खोजे हुई है। इसमें से एक खोज अर्थिंग के प्रकारों को लेकर भी है। आपको बता दें कि, वर्तमान में अर्थिंग के प्रकार ख़ासकर स्थान पर, काम पर और लोड पर निर्भर है। जैसा कि, घर के लिए अलग अर्थिंग होती हैं, ठीक इसी तरह फैक्टरी के लिए अलग तरह की अर्थिंग होती हैं। वही स्थान के हिसाब से भी अर्थिंग अलग तरह की होती हैं। मतलब अर्थिंग काम पर, स्थान पर और वोल्टेज पर निर्भर करती हैं। फैक्ट्री में ज्यादा वोल्टेज की बिजली इस्तेमाल की जाती हैं। इसलिए वहा घर पर किए जाने वाले अर्थिंग से अलग तरह की अर्थिंग की जाती हैं। वही घर में कम वोल्टेज वाली बिजली होती हैं इसलिए वहा पर अलग तरह की अर्थिंग की जाती हैं। निचे हमने अर्थिंग के कुछ प्रमुख प्रकार बताए हैं। जो ज्यादातर यूज होते है।

1) पाइप अर्थिंग (pipe earthing)

1.5 से 2 इंच मोटे और 8 से 9 फिट लंबे पाइप से जो अर्थिंग की जाती हैं, उसे पाइप अर्थिंग (pipe earthing) कहते है। इस पाइप अर्थिंग मे पाइप को एक नमी वाले स्थान पर 8 से 9 फिट गहरा गड्ढा करके उसमें नमक और कोयला डाल के पाइप को गाड़ दिया जाता है और इस पाइप से अर्थिंग वायर जोड़ कर पाइप अर्थिंग (pipe earthing) तयार की जाती हैं।

2) रॉड अर्थिंग (Rod earthing)

रॉड अर्थिंग (Rod earthing) भी अर्थिंग का एक महत्त्वपूर्ण प्रकार है। रॉड अर्थिंग भी पाइप अर्थिंग की तरह ही होती है। इस रॉड अर्थिंग में 12 mm की तांबे की रॉड इस्तेमाल की जाती हैं। इस रॉड अर्थिंग में गड्ढा करने की और नमक, कोयले की जरुरत नहीं पड़ती है। इस प्रकार के रॉड अर्थिंग में केवल तांबे के रॉड को हथौड़ी से ठोक कर सीधा जमीन में गाड़ दिया जाता है और उससे अर्थिंग वायर जोड़ कर इस प्रकार की अर्थिंग तयार की जाती हैं।

3) प्लेट अर्थिंग (plate earthing)

प्लेट अर्थिंग (plate earthing) भी अर्थिंग का एक प्रमुख प्रकार है। इस प्रकार के अर्थिंग में रॉड या पाइप का इस्तेमाल नहीं किया जाता हैं बल्कि उसके जगह पर तांबे की एक प्लेट इस्तेमाल की जाती हैं। इसलिए इसे प्लेट अर्थिंग (plate earthing) कहते है। आपको बता दें कि, इस तरह के प्लेट अर्थिंग में जिस तांबे की प्लेट का इस्तेमाल किया जाता है। उसका आकार 60cm*60cm*3.18mm (2फिट*2फिट*1.8इंच) होता है और इस प्लेट को नमी वाली जगह पर 10 फिट का गड्डा करके गाड़ दिया जाता हैं और उससे अर्थिंग वायर स्थापित करके प्लेट अर्थिंग निर्माण की जाती हैं।

4) केमिकल अर्थिंग (chemical earthing)

केमिकल अर्थिंग भी अर्थिंग का एक प्रमुख प्रकार है। आपको बता दें कि, केमिकल अर्थिंग (chemical earthing) खासकर ज्यादा नमी वाले स्थान पर या पथरीली जमीन वाले स्थान पर की जाती हैं। इस केमिकल अर्थिंग में रॉड के साथ केमिकल के रुप में कार्बन पावडर और बेंटोनाइड पाउडर इस्तेमाल की जाती हैं। इसलिए इसे केमीकल अर्थिंग कहा जाता है।

नमी वाले स्थान पर ही अर्थिंग क्यों की जाती हैं?

ऐसा जरुरी नहीं है कि, अर्थिंग नमी वाले स्थान पर ही की जाती हैं। पर ज्यादा तर आपने देखा होगा कि, अर्थिंग नमी वाले स्थान पर ही अर्थिंग की जाती हैं? इसके पीछे की वजह है, धरती के साथ अच्छे से कनेक्ट रहना है। अर्थात धरती से अर्थिंग का संबंध अच्छे से स्थापित करने के लिए ही नमी वाले स्थान पर ही अर्थिंग की जाती हैं।

दोस्तों यह थीं अर्थिंग क्या होती हैं? (Earthing kya hoti hai) अर्थिंग क्यों जरुरी है (earthing kyun jaruri hai) और अर्थिंग के कितने प्रकार होते हैं। (Type of earthing) इसकी विस्तृत जानकारी। आशा करता हूं आपको यह जानकारी पसंद आई होगी।

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