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जलवायु परिवर्तन जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। आइए जानते हैं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी सारी जानकारी

जलवायु परिवर्तन (Jalvayu parivartan)
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हर किसी के दिमाग में यह सवाल जरुर उठता है कि, वैज्ञानिक, बडी बडी संस्थाएं यहां तक की सरकारें भी ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन आदी से जुड़ी समस्याओ को लेकर लोगों को हर रोज बता रही है और इसे रोकने के लिए लोगों क्या करना चाहिए बता रही हैं। लेकिन जलवायु असल में है क्या और किसे कहते है? यह कोई नहीं बताता। इस लेख में हम जलवायु किसे कहते है? जलवायु परिवर्तन क्या है? जलवायु परिवर्तन के कारण क्या हैं? जलवायु परिवर्तन के परिणाम और जलवायु परिवर्तन को रोकने के उपाय आदी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

जलवायु किसे कहते है? (What is climate)

जलवायु मतलब किसी प्रदेश या क्षेत्र से जुड़ा मौसम होता है। याने कि, किसी क्षेत्र का मौसम लंबे समय तक एक ही स्थिती में बने रहने के स्थिती को जलवायु कहते हैं।

जलवायु परिवर्तन किसे कहते हैं? (what is climate change)

जलवायु परिवर्तन मतलब किसी भूभाग का, किसी प्रदेश या देश का या फिर पूरे विश्व का जो मौसम सैंकड़ों साल से बना हुआ था। उसमें अचानक से बदल होना, मतलब जलवायु परिवर्तन होता है। (climate change in hindi)

जलवायु परिवर्तन को उदाहरण के तौर पर देखे तो, दुनिया में तीन प्रमुख मौसम बारिश, सर्दी और गर्मी है। इसके अलावा चार प्रमुख ऋतु बसंत, गर्मी, पतझड़ और शीत है। आपने इन्हे जरुर महसुस किया होगा कि, ये सब मौसम और ये सब ऋतु अपने अपने वक्त पर आते है और जाते हैं। लेकिन कुछ दशकों में इनमें हमे अनियमितता दिखाईं दे रही है। जैसे गर्मी के मौसम में बारिश का आना। बारिश के मौसम में भयंकर गर्मी पड़ना। इस प्रकार की ये सभी स्थितियां जलवायु परिवर्तन की है।

जलवायु परिवर्तन के कारण (climate change causes)

जलवायु परिवर्तन के लिए मानव और प्रकृति दोनों ही ज़िम्मेदार है। लेकिन पीछले सौ साल के डेटा का जब वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया तो, पता चला कि, जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे ज्यादा ज़िम्मेदार मानव ही है। इसलिए जलवायु परिवर्तन के कारणों को दो भागों में विभाजित किया जाता है। एक मानवीय कारण और दूसरे प्राकृतिक कारण

जलवायु परिवर्तन के मानवीय कारण

जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार मानव है। ना की प्रकृति। आपको बता दें कि, पृथ्वी पर जो जीवन फल फूल रहा है। इसमें ग्रीनहाउस गैस के परत का बड़ा योगदान है। जीवन को पनपने के लिए जिस जरूरी तापमान की जरूरत होती है। उसका संतुलन बना कर रखने में ग्रीनहाउस गैस के परत का बड़ा योगदान होता है। यह परत मिथेन, नायट्रस ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन आदी गैसों से बनी होती हैं। इन गैसों में मानव गतिविधि के कारण बड़ी बढ़ोत्तरी हो रही है। जिस कारण वैश्विक तापमान बढ़ रहा है और वैश्विक तापमान बढ़ने से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इसके लिए जो मानवीय गतिविधियां जि़म्मेदार है, वो कुछ इस तरह की है।

परिवहन

जलवायु परिवर्तन के लिए प्रमुख मानवीय कारण परिवहन को माना गया है। जलवायु परिवर्तन में परिवहन का हिस्सा 25 प्रतिशत है। क्युकी परिवहन क्षेत्र सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है।

आपको बता दें कि, ग्रीनहाउस गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन हमारी कारो, ट्रेनों, ट्रको जहाजों और विमानों के कारण होता है। इन्हे चलाने के लिए जीवाश्म इंधनों की जरूरत होती है खासकर पेट्रोलियम आधारित। इसमें भी मुख्य रूप से गैसोलीन और डीजल शामिल हैं।

बिजली उत्पादन

जलवायु परिवर्तन के लिए दूसरा सबसे बड़ा मानवीय कारण बिजली उत्पादन के दौरान निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसे है। आपको बता दें कि, बिजली उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा जीवाश्म इंधनों के द्वारा निर्मित किया जाता है। खासकर कोयला और प्राकृतिक गैस से।

उद्योग

जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन का कारण

जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार तीसरा सबसे बड़ा कारण उद्योग क्षेत्र है। मानवी हरकत के कारण जीतना ग्रीनहाउस गैस वातावरण में जाता है उसके 24 प्रतिशत गैस इस क्षेत्र से जाता है। आपको बता दें कि, उद्योगो को चलाने के लिए जो ऊर्जा लगती हैं। उस ऊर्जा का उत्पादन जीवाश्म इंधनों को जलाकर ही किया जाता है। इसके अलावा कच्चे माल से पक्का माल जब बनाया जाता है, तब कुछ रासायनिक क्रिया होती हैं और इन रासायनिक क्रियाओ से भी घातक वायु वातारण में घुल जाते है। जिसके चलते जलवायु परिवर्तन होता है।

शहरीकरण

जलवायु परिवर्तन में मानवों द्वारा निर्मित शहरों का भी बड़ा योगदान है। अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए मनुष्य ने बड़ी मात्रा में में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है। प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के चलते मनुष्य ने जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण आदी प्रकार के प्रदूषणों को जन्म दिया है। अपने जीवन को सुखी बनाने के चक्कर में मनुष्य ने पूरे सृष्टि को ही संकट में लाकर खड़ा कर दिया है।

जलवायु परिवर्तन के प्राकृतिक कारण

जलवायु परिवर्तन के लिए केवल मानव गतिविधियां ही जि़म्मेदार नही है। कुछ प्राकृतिक गतिविधियां भी जिम्मेदार है। लेकिन जलवायु परिवर्तन में सबसे ज्यादा योगदान हमने मतलब मानव ने ही दीया है, ना कि प्रकृति ने। लेकिन जो कुछ भी प्राकृतिक गतिविधियां जलवायु परिवर्तन के लिए जि़म्मेदार है वो कुछ इस तरह की है।

महाद्वीप

आज विश्व में हमे भलेही 7 महाद्वीप दिख रहे होगे। लेकिन एक समय धरती पर केवल एक ही महाद्वीप था। बाद में इसके टुकड़े होकर होकर 7 महाद्वीप बने। उदाहरण के तौर पर अगर हम दक्षिण अमेरिका और आफ्रीका महाद्वीप के नक्शे को देखें तो, हमे दोनों ही अलग अलग महाद्वीप नजर आते है। लेकिन इन्हे जोड़कर देखा जाए तो, ये बराबर एक दूसरे में फिट बैठते है। वैज्ञानिकों का मानना है कि, लगभग 200 मिलियन वर्ष पहले ये दोनो एक ही महाद्वीप थे। बाद में दोनों अलग अलग हुए।

आज हम जो ये 7 महाद्वीप देख रहे हैं। वो लाखों साल पहले एक ही भूभाग का हिस्सा थे और उनका खुद का अलग मौसम था। बाद में वे टूटकर 7 भागों में विभाजित हुए और उनका मौसम भी अलग अलग हुआ। जैसे कि, नदियों के बहाव में बदलाव आया, कुछ नई नदियों और झीलों का निर्माण हुआ। नए महासागर बने, हवाओं की दिशा बदल गई, तो वही कही रेगिस्तान बने तो, कहीं बर्फ के भूभाग। मौसम में इस प्रकार के बदलाव को प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन के नाम से जाना जाता है

ज्वालामुखी

ज्वालामुखी

जलवायु परिवर्तन का कारण ज्वालामुखी

जलवायु परिवर्तन का एक और प्रमुख कारण ज्वालामुखी को भी माना जाता है। जब ज्वालामुखी फटता है, तब उसमें से बड़ी मात्रा में जल बाष्प, धूल, राख और सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) बाहर निकलता है। वैसे तो ज्वालामुखी की गतिविधी कुछ दिनों या महीनों तक ही रहती है। लेकिन ज्वालामुखी द्वारा निकले घटक कई सालों तक वातावरण में मौजूद रहते हैं और आस पास के जलवायु को प्राभावित करते हैं।

अप्रैल 1991 में फिलिपिंस द्वीप पर का एक ज्वालामुखी (नाम पिनाटाबो ज्वालामुखी) जब फटा था, तब हजारों टन गैस उसने वातावरण में छोड़ी थी और सौर विकिरण की मात्रा को कम कर दिया था।

जलवायु परिवर्तन के लिए एक और उल्लेखनीय ज्वालामुखी का हम यहां जिक्र करना चाहेंगे। आपको बता दें कि, 1815 में जब इंडोनेशिया के तंबोरा ज्वालामुखी का विस्फोट हुआ था, तब उसने पूरे पश्चिम यूरोप के मौसम को प्राभावित किया था।

सूरज

जलवायु परिवर्तन के लिए सूरज भी जिम्मेदार है। यह बात सबको थोड़ी खटक रही होगी। क्योंकि सब जानते हैं कि, सूरज पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने में काफी मदद करता है। जीवन को पनपने के लिए जो पर्याप्त गर्मी चाहिए होती हैं। वह पृथ्वी पर सूरज से ही आती है। फिर कैसे सूरज जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

आपको बता दें कि, सयुक्त राष्ट्र के इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज के वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हुए हैं कि, पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन में सूरज भी अपनी भूमिका रहा है।

सूरज

जलवायु परिवर्तन का कारण सौर तूफान

टीम द्वारा किए गए शोध से पता चला है कि, सूरज पर जब भी विभिन्न गतिविधियां होती हैं जैसे कि, सौर तूफान, सौर ज्वालाएं आदी, तब उसका असर ना केवल पृथ्वी पर बल्की पूरे सौर मंडल पड़ता है। इसलिए सूरज भी जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है।

वनों की कटाई

ग्रीनहाउस गैसों को नियंत्रित करने में और जलवायु को सामान्य बनाए रखने में वृक्ष बड़ी भूमिका अदा करते हैं। लेकिन हमने बड़े बड़े शहर बसाने के लिए, रोड़ का निर्माण करने के लिए, घर बनाने के लिए, कारखानों के लिए, और खेती के लिए बिना सोचे समझे पेड़ो की कटाई की और जलवायु परिवर्तन में अपना बड़ा योगदान दिया।

जलवायु परिवर्तन के परिणाम (climate change effects)

जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी दुनिया पर आपदा के बादल मंडरा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कुछ प्रमुख परिणाम कुछ इस प्रकार है।

उच्च तापमान

जलवायु परिवर्तन के बढ़ता तापमान

जलवायु परिवर्तन के बढ़ता तापमान

परिवहन, बिजली उत्पादन, उद्योग, शहरीकरण, वनों की कटाई आदी मानवीय कृत्यों ने पृथ्वी के के वातावरण में बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों को छोड़ा है। ग्रीनहाउस गैसों का बड़ी मात्रा में उत्सर्जन होने से पृथ्वी का तापमान अपेक्षाकृत काफ़ी तेज़ी से बढ़ा है। आपको बता दें कि, पीछले 150 वर्षों में वैश्वीक औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान समय में दुनिया का तापमान 0.8 अंश सेल्सियस से बढ़ा है। यह आंकड़ा वैसे हमें दिखने में भलेहि काफी छोटा लगता हो। लेकिन इसके परिणाम काफ़ी भयानक दिख रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि, यदि इसपर रोक नहीं लगाई गई और यह ऐसे ही बढ़ता गया तो, आने वाले समय मे खाद्य सुरक्षा, मंहगाई, बेरोजगारी, बीमारियां आदी समस्याओं का जन्म होगा।

मौसम में बदलाव

बाढ़, सुखा, चक्रवात आदी मे अनियमितता जैसे गर्मी के मौसम में तेज बारिश का आना, सर्दियों मे तेज धूप पड़ना आदी बदलाव जो वर्तमान में मौसम में आ रहे हैं। यह सभी जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है।

पृथ्वी के घृणन में बदलाव

अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के रिसर्च लेटर में प्रकाशित जानकारी से पता चला है कि, जलवायु परिवर्तन के कारण 1990 के दशक से काफी तेजी से ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ग्लेशियर पिघलने के कारण पृथ्वी के घृणन गती में बदलाव आया है। अध्ययन से पता चला है कि, भलेही पृथ्वी के घृणन गती जलवायु परिवर्तन से बढ़ी हो। लेकिन फिलहाल उसका कोई विपरित प्रभाव हम पर नही पड़ा है। अभी केवल घृणन गती बढ़ने से दिन का कालावधि कुछ मिली सेकंड से लंबा हुआ है। लेकिन इस तरह ही अगर चलता रहा तो। भविष्य में यह भी एक समस्या बन सकती है। आपको बता दें कि, जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के घूमने की गती 17 गुणा बढ़ गई हैं। जो अच्छा संकेत नहीं है।

पृथ्वी के झुकाव में बदलाव

बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर के ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं। इन ग्लेशियरों के पिघलने के कारण ना केवल पृथ्वी के घृणन गती में परिर्वतन आ आया हैं बल्की पृथ्वी के झुकाव में भी परिवर्तन आया है। आपको बता दें कि, पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करती है। जो अंडाकार है। पृथ्वी का जो अक्षीय झुकाव है वह 23.5 डिग्री है। पृथ्वी के इस अक्षीय झुकाव के कारण ही हमे विभिन्न मौसम पता चलते है और सूरज भी हमे सालभर अलग अलग अक्षाओ पर चमकता हुआ दिखाई देता है। जब पृथ्वी के झुकाव में परिर्वतन होता है तो, उसका असर सीधा मौसमों पर पड़ता है। अधिक झुकाव का अर्थ गर्म ग्रीष्मकाल और कड़कड़ाती सर्दीया, कम झुकाव मतलब साधा ग्रीष्मकाल और हल्की सर्दियां। नासा के अनुसार हर साल 10 सेंटीमीटर के रफ्तार से 100 सालों में ध्रुवीय गती लगभग 10 मीटर से प्रवाहित होती हैं। लेकिन जब से वैश्विक तापमान में वृद्धि हुई है और जलवायु में परिर्वतन हुआ है, तब से पृथ्वी के झुकाव में गती आई है।

महासागरीय धाराएं

शायद आप जानतें होगे कि, पृथ्वी को जलग्रह भी कहा जाता है क्योंकि पृथ्वी के 71 प्रतिशत हिस्से पर केवल पाणी का कब्जा है। पृथ्वी पर सबसे ज्यादा पाणी महासागरो में पाया जाता है। आपको बता दें कि, पाणी सूर्य से आने वाली ऊर्जा को वातावरण से दुगनी मात्रा में अपने में अवशोषित करता है और उस ऊर्जा को महासागर अपने धाराओं के जरिए पृथ्वी के चारों ओर वितरीत करता है। जिससे पृथ्वी के तापमान में संतुलन बना रहता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण महासागरों की धाराएं लगातार कमजोर होती जा रही है। जिस कारण महासागर सूर्य के अवशोषित उर्जा को समान रूप से चारों ओर वितरीत नही कर पा रहा है। बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण महासागरों के धाराओं का तंत्र अस्थिर हो गया है। जिसके चलते कुछ स्थानों पर भीषण गर्मी तो, वही कुछ स्थानों पर भीषण ठंड पड़ रही है। इसके अलावा बारिश के मौसम पर भी परिणाम आया है।

आपको बता दें कि, दुनिया में सबसे ज्यादा व्यापार समंदर के रास्ते होता है। क्युकी वह बाकी मार्गों से काफी सस्ता पड़ता है। लेकिन धाराओं का तंत्र जलवायु परिवर्तन से बाधित होने से परिवहन पर भी असर पड़ा है। इसके अलावा महासागरों के धाराओं का तंत्र अस्थिर होने से जलीय जीवन भी प्रभावित हुआ है।

ग्लेशियरों का पिघलना

जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन के कारण पिघलते ग्लेशियर फोटो:- pixabay

सूर्य से आने वाली अतिरिक्त ऊष्मा को वापस अंतरिक्ष में भेजने का काम हिम या बर्फ या फिर ग्लेशियर करते हैं। जिसके चलते महासागर यू कहे तो पृथ्वी सुरक्षित रहती है। ग्लेशियरों के पिघलने से सूर्य की अतिरिक्त ऊष्मा जो पहले वापस अंतरिक्ष में जाती थी अब वह यही रह जा रही है।

इसके अलावा वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन कारण पिघल रहे ग्लेशियर से महासागर के जल में तेजी से वृद्धि हो रही है। महासागर का बढ़ता जल स्तर सभी स्थलीय जीवों को प्रभावित कर सकता है।

आपको बता दें कि, मालदीव की समुद्र तल से ऊंचाई काफी कम है। अगर समंदर का जल स्तर ऐसे ही बढ़ता गया तो, एक दिन यह देश पूरी तरह से समंदर में समा सकता है। इसके अतिरिक्त अगर बात हम भारत की करे तो, भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पुरी तरह से समंदर में बनी हुई एक दिन वह भी समंदर में समा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो, उसका असर पूरे देश पर पड़ेगा।

मानव स्वास्थ पर परिणाम

वर्तमान में जिस प्रकार से भयानक बीमारियां बढ़ रही है। उसके पीछे कि, वजह कुछ विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन को मानते है। उनके अनुसार बैक्टीरिया को पनपने के लिए जो मौसम चाहिए वह मौसम जलवायु परिवर्तन के कारण उनके लिए अनुकूल होता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण कुछ नए प्रजातियों की भी उत्पत्ति हो रही है। जिसका असर सभी पर पड़ रहा है।

जैवविविधता पर प्रभाव

किसी भी प्रजाती को जीने के लिए अनुकूल और स्थिर वातावरण की जरूरत होती है। वातावरण में अचानक बदलाव किसी भी प्रजाती को नामशेष कर सकता है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय (climate change solutions)

लोगों को प्रोत्साहित करे

जलवायु परिवर्तन को लोगों के सहयोग के बिना कभी पुरा नही किया जा सकता। इसलिए जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हमें एक दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिए।

परिवहन का इस्तेमाल

आपको बता दें कि, सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लगभग 25 प्रतिशत उत्सर्जन परिवहन के कारण होता है। वैसे वर्तमान में इसे रोकने के लिए सभी देश की सरकारें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नीती नियमो को बना रही है। हमारी भी इसे रोकने के लिए कुछ जिम्मेदारी बनती हैं। हम भी अपने तरफ से कुछ प्रयास कर सकतें है। जैसे गाड़ी का कम इस्तेमाल, कम दूरी के लिए साइकल चलाना, अगर यात्रा की या फिर अपने ऑफिस की दूरी ज्यादा है तो, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करके हम अपना थोड़ा योगदान अपने सृष्टि को बचाने के लिए दे सकते हैं। इसके अलावा अपने सोच से ऊपर उठकर इलेट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करके हम अपना थोड़ा योगदान दे सकते हैं।

मच्छरों से कई बीमारीयां फैलती है फिर हम क्यों नही धरती से मच्छरों का खात्मा कर देते है? मच्छरों का खात्मा पर्यावरण के लिए क्यों खतरनाक है?

अपने शक्ती का सही इस्तेमाल

यदि आप आर्थिक मामले में ठीक है तो, आप शून्य कार्बन वाले उर्जा स्रोत के तरफ बढ़ सकतें है। जैसे सौर ऊर्जा। आपको बता दें कि, सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करके भी हम ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी ला सकते हैं। बेवजह एयर कंडीशनर के उपयोग से बचकर हम वातावरण में जानें वाले जहीरिली गैस को रोक सकते हैं।

आपको बता दें कि, फैशन उद्योग वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 8 -10 प्रतिशत अपना योगदान देता है। यदि हम अपने फैशन पर थोडी रोक लगाते हैं तो, जैसे नए कपड़े कम खरीदकर, कपड़ो को अधिक समय तक इस्तेमाल करके, कपड़ो को रिसायकाल करके आदि चीजे करके हम इस 10 प्रतिशत के फालतू होने वाले कार्बन उत्सर्जन को रोक सकते हैं।

पेड़ लगाकर

जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन पर उपाय पेड़ो का संरक्षण फोटो:- pixabay

स्विजरलैंड के वैज्ञानिको ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। जिसमें उन्होंने बताया है कि, जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए पेड़ भी हमारी बड़ी मात्रा में मदद कर सकते हैं। रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा है कि, जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हमें 1000 अरब यानी 10 खरब पेड़ पुरी दुनिया में लगाने होगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, इतने पेड़ लगाने के लिए हमें अमेरिका के क्षेत्रफल के बराबर यानी 96.3 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन की जरूरत है। इसी रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि, इतने पेड़ लगाने के लिए पुरी दुनिया में उतनी खाली जमीन मौजुद है। इसके लिए हमें खेतों के का इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं है।

रिसर्च के मुताबिक़ बताया गया है कि, यदी इतने पेड़ लगाए जाते है तो, हम वातावरण में मौजूद 830 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड को खतम कर सकते हैं। जिसे हमने केवल 25 सालों में वातावरण में छोड़ा है।

दोस्तों यह थीं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पुरी जानकारी। आशा करता हू यह लेख आपको जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पुरी जानकारी प्रदान करता होगा।

हमारे पाठक ब्रिजेश जी के सुझाव पर हम इस लेख मे उनके द्वारा दिए गए कूछ लिंक को डाल रहे है। जो आपको जलवायु परीवर्तन से जुड़े  वर्तमान अपडेट को दिखाएंगे

Please refer these sites or current updates-

1. http://berkeleyearth.org/

2. https://www.climatelevels.org/

3. http://www.columbia.edu/~jeh1/

4. https://data.giss.nasa.gov/gistemp/

5. https://data.giss.nasa.gov/gistemp/graphs_v4/customize.html

6. https://guymcpherson.com/

 

And these sites for probable solutions

1. https://drawdown.org/

2. https://www.meer.org/

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3 thoughts on “जलवायु परिवर्तन जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। आइए जानते हैं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी सारी जानकारी”

  1. Res Sir/Madam,

    Sorry to say something because it is related to all lives.

    Please refer these sites or current updates-
    1. http://berkeleyearth.org/
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    5. https://data.giss.nasa.gov/gistemp/graphs_v4/customize.html
    6. https://guymcpherson.com/

    And these sites for probable solutions –
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    You must update your information accordingly. Be very clear about EEI ie Earth Energy Imbalance which is about 1.6w/m2 mean 13.33 Hirosima like atom bomb exploding per second ~= 11.5 lakhs per day energy adding into Mother Earth environment.

    Thanks with regards
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