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मोहम्मद रफीक साबिर एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंनेे जिन्ना पर अलग पाकिस्तान की मांग करने पर चाकू से हमला किया था

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खान सिद्दीकी अल हिन्द| मोहम्मद रफीक साबिर| मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी| muslim freedom fighter of India in hindi| मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी|भारत के मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी| मोहम्मद अली जिन्ना|

मोहम्मद रफीक साबिर भारत के एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं। जिन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना पर अलग पाकिस्तान मांगने पर उनके उपर घर में घुस कर चाकू से हमला किया था। जानकर मानते है कि, अगर इस हमले में जिन्ना मारा जाता तो शायद आज वर्तमान में जो पाकिस्तान हम देख रहे हैं। शायद वह पाकिस्तान कभी बनता ही नहीं। लेकिन स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर के हमले से जिन्ना बच निकले थे।

विकिपीडिया और दैनिक भास्कर में मिले लेख के मुताबिक़, मोहम्मद रफीक साबिर भारत के उन तमाम स्वतंत्रता सेनानीयो में से एक थे। जो भारत विभाजन के बिलकुल कट्टर विरोधक थे।

कहा के रहने वाले थे मोहम्मद रफीक साबिर :-

विकिपीडिया और दैनिक भास्कर न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद रफीक साबिर जी का जन्म पूर्वी पाकिस्तान में हुआ था। उनका मूल स्थान लाहौर था। उनके पिताजी का नाम उमरदीन था। जो लाहौर में ही एक जिला अदालत में मुंशी के पद पर कार्यरत थे। जानकारी के मुताबिक, रफीक साबिर के पिता मूल रूप से मोजअ कोट अब्दुल्लाह के निवासी थे। यह स्थान भी वर्तमान के पाकिस्तान में ही पड़ता है। जो वहा पर प्रसिद्ध पीर अब्दुल अजीज के नाम से विश्व प्रसिद्ध है।

आजादी मे सबसे बड़ा रोड़ा थे जिन्ना :-

अंग्रजो से देश को आजाद कराने के लिए उस समय आजादी की लड़ाई लड़ने वाले देश में दो ही दल थे। एक कांग्रेस और दूसरा मुस्लिम लीग! इन दोनों ही दलों का शुरुआत में एक ही मकसद था और वह था भारत को अंग्रेजो से आजाद कराना। लेकिन बाद में समय के साथ मुस्लिम लीग का मकसद बदल गया और वे आजादी तो चाहते थे लेकिन मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र भी चाहते थे। यह चाह मुस्लिम लीग और इसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना की थी।

दैनिक भास्कर न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर, जिन्ना को आजादी के लड़ाई में सबसे बड़ा रोड़ा मानते थे। उनका मानना था कि, कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना अंग्रेजो के चाटुकार है। वे हिंदुस्तान के आजादी के रास्ते में रुकावट के अलावा अंग्रेजो के हाथ के खिलौना भी है। और इसी वजह से हमारी आजादी की लड़ाई कमजोर हो रही है।

आगे स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर जी का मानना था कि, “जब हमें सबसे ज्यादा जरूरत देश को अंग्रेजो से आजाद कराने की थी, तब कायदे आजम जिन्ना देश को आजादी दिलाने से ज्यादा देश को दो टुकड़ों में बांटने की कवायद कर रहे थे।” जो स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर जी को काफ़ी दुर्भाग्य पूर्ण लगा और इसी चीज को उनका सबसे ज्यादा विरोध था।

जिन्ना को घर में घुसकर मारा चाकू :-

“कुत्ता जब पागल हो जाए तो उसे गोली मार देनी चाहिए” यह कहावत मोहम्मद अली जिन्ना के लिए बिलकुल सटीक बैठती है। क्युकी लाख समझाने के बावजूद भी जिन्ना अलग पाकिस्तान बनाने के जिद पर अड़े रहे। उनको भारत के आजादी से ज्यादा नया पाकिस्तान देश चाहिए था।

जिन्ना की यही बात 25 साल के स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर जी को खटक रही थी। रफीक साबिर को लगने लगा था कि, कायदे आजम जिन्ना के रहते हुए देश को आजादी नही मिलेंगी। उनके इस मांग के कारण आजादी की लड़ाई लंबी चलेंगी और अगर देश आज़ाद हुआ भी, तो उसके दो टुकड़े होंगे। जो रफीक साबिर जी को हजम नहीं हो रही थी और इसीलिए उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को मारने की साजिश रची। अपने बनाए साजिश के तहत 25 साल के युवा स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर लाहौर से मुम्बई आए।

जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद रफीक साबिर ने 26 जुलाई 1943 को जिन्ना पर चाकू से हमला किया। कहा जाता है कि, इस दिन रफीक साबिर अपने साथ चाकू लेकर जिन्ना के मुंबई वाले घर पर दाखिल हुए। जहा पर जिन्ना रह रहे थे। जिन्ना को देखकर मोहम्मद रफीक साबिर आदर भाव से उनके पास गए और अचानक से उनपर चाकू से कई वार किए।

मोहम्मद रफीक साबिर द्वारा चाकू से किए गए इस हमले में जिन्ना को कई चोटे आई। लेकिन जिन्ना इस हमले में अपने कुछ साथियों के कारण बच गए। क्युकी जिन्ना के साथियों ने वक्त रहते ही मोहम्मद रफीक साबिर को पकड़ लिया। जिस कारण जिन्ना बच निकले।

स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर द्वारा किए गए हमले में जिन्ना को गर्दन, बाए कंधे और थोड़ी बहुत कलाई पर चोटे आई।

कहा जाता है कि, अगर मोहम्मद रफीक साबिर द्वारा किए गए इस हमले में जिन्ना अगर मारे जाते और मोहम्मद रफीक साबिर नही पकड़े जाते, तो देश में एक नया और बड़ा मामला उत्पन्न होता।

हमले के कारण जेल भी गए मोहम्मद रफीक साबिर :-

जिन्ना पर चाकू से हमला करने के बाद, जब जिन्ना के साथियों ने मोहम्मद रफीक साबिर को पकड़ लिया, तब उन्होनें मोहम्मद रफीक साबिर को पुलिस के हवाले किया। जिसके बाद मोहम्मद रफीक साबिर को मुंबई के ही हिज लॉर्ड शिप के अदालत में पेश किया गया और उनपर मुकदमा चलाया गया।

जब कोर्ट ने उन्हें पूछा कि, उन्होंने जिन्ना पर चाकू से हमला क्यो किया था, तब स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर ने कोर्ट को बताया कि, जिन्ना देश को आजादी मिलने मे एक रुकावट है। वे देश के टुकड़े करना चाहते हैं और वे देश के टुकड़े होते हुए नही देख सकते। इसलिए उन्होंने जिन्ना को जान से मारना चाहा।

स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर का बयान सुनने के बाद और बाकि इनके खिलाफ़ गवाही देने वालो के गवाहो को सुनने के बाद कोर्ट ने उन्हें धारा ‘3 क’ और ‘3 के’ के अंतर्गत पांच साल कैद की सजा सुनाई। लेकिन जिन्ना के समर्थक कोर्ट से मांग करते रहें कि, रफीक साबिर को मौत की सजा सुनाए। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

कोर्ट द्वारा पांच साल कैद की सजा सुनाने के बाद स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर को 4 नवम्बर 1945 को यरवडा सेंट्रल जेल में भेज दिया गया। उसके बाद उन्हें वहां से निकालकर 12 एप्रिल 1945 को आर्थर रोड के सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

पाकिस्तान उन्हे बड़ा आतंकी मानता है:-

पाकिस्तान के निर्माण के बाद जहां एक तरफ पाकिस्तानी जिन्ना को पाकिस्तान का जनक मानते है और उन्हें कायदे आजम का दर्जा देते हैं। तो वही दूसरी तरफ पाकिस्तानी मोहम्मद रफीक साबिर को एक बड़ा आतंकी  मानते है।

आपको बता दें कि, पाकिस्तान में मौजुद कई जानीमानी किताबों में इस बात का प्रमुखता से जिक्र किया गया है कि, मोहम्मद रफीक साबिर ने कायदे आजम मुहम्मद अली जिन्ना को मारने की नाकाम कोशिश की थी। वहा पर मौजुद उर्दू भाषा की कई किताबो में जिन्ना को जहां एक तरफ पाकिस्तान का हीरो बताया है, तो वही दूसरी तरफ स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर को विलेन बताया है।

नही मांगी कोई सहायता :-

जिन्ना पर उनके द्वारा किए गए हमले के चलते जब उन्हें पांच साल की जेल हुईं, तब जेल से रिहा होने के बाद स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर ने अपने जीवन के कुछ दिन मुंबई में ही बिताए। उसके बाद वे इंदौर गए और वहीं बस गए।

विकिपीडिया और दैनिक भास्कर न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद रफीक साबिर ने इंदौर आने के बाद 24, गफूर खां की बजरिया और रानीपुरा में सालों तक लकड़ी बेचने का काम किया। जीते जी स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर ने कभी भी किसी भी तरह की मदत सरकार से नही मांगी। इस बारे में उनका कहना था कि, “जो सबको दीया जा रहा है, वह उन्हे भी अपने आप मिलना चाहिए।”

बहुत हालाखी का जिवन जी रहें हैं इस महान स्वतंत्रता सेनानी के बेटे :-

3 अगस्त 1990 को इस महान स्वतंत्रता सेनानी का निधन हुआ। जब उनका निधन हुआ, तब उनके घर की स्थिती काफ़ी बिकट थीं। उनके दो बडे़ बेटे काम के लिए इधर उधर भटक रहे थे। तो वहीं उनका सबसे छोटा बेटा भी काफ़ी बिकट स्थिती में जी रहा था। छोटे बेटे के पास तो ख़ुद का मकान तक नहीं है और वह भाड़े के घर में अपना गुजारा कर रहा है। ऐसी दैनिक भास्कर न्यूज की रिपोर्ट बताती है। पिताजी के निशानी के तौर पर उनके पास कुछ चंद फोटो और कुछ चंद कागजात है।

कई बार दीया आवेदन, पर मिला आश्वासन :-

दैनिक भास्कर न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रीडम फाइटर मोहम्मद रफीक साबिर के बेटो ने कई बार जिला प्रशासन को घर या नौकरी के लिए आवेदन दिए। लेकिन उन्हे केवल आश्वासन ही मिला।

एक बार जरुर उन्हे एक तत्कालीन कलेक्टर की पहल से वर्ष 2004 में मकान आवंटित किया गया था लेकिन अग्रिम रक्कम उनके पास ना होने के कारण। उन्हे वह मकान नही मिल पाया।

इसके अलावा उनके बेटों ने शहरी गरीबी प्रकोष्ठ में भी कई आवेदन किए। लेकिन उन्हे आश्वासनों के अलावा कुछ भी नहीं मिल सका।

पर एक बात का जिक्र हम यहां जरुर करना चाहेंगे कि, दिल्ली के कुछ सांसदों ने उन्हें अपने पास आने को कहा। ताकी वे उनकी बात संसद में उठा सके।

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ऐसे मिली थीं मोहम्मद रफीक साबिर को खान सिद्दीकी अल हिन्द की पहचान :-

आजादी की लड़ाई में जिस तरह से देश का युवा बढ़ चढ़कर भाग ले रहा था। उसी प्रकार से मोहम्मद रफीक साबिर ने भी आज़ादी के लड़ाई महज 20 – 25 डाल के उम्र में हिस्सा लिया।

1925 को मोहम्मद रफीक साबिर ने अंग्रेजो के खिलाफ़ चल रहे एक बड़े आंदोलन को देखा। जिससे प्रेरित होकर वे भी आज़दी के लड़ाई में शामिल हुए।

जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में मोहम्मद रफीक साबिर ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई लड़ी। लेकिन जब मुस्लिम लीग का मकसद उन्हे पता चला, तब मुस्लिम लीग से अलग हुए और अन्य लोगों के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई लड़ने लगे।

गूगल पर मिले जानकारी के मुताबिक, जब देश आज़ाद हुआ, तब आजादी की लड़ाई लड़ने के बाद भी वे इंदौर के कई समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ़ चल रहे आंदोलनों में भी शामिल हुए और लोगों की मदत की। जिस कारण लोगों ने उन्हें “खान सिद्दीकी अल हिन्द” का दर्जा दिया और वे इस नाम से देश में मशहूर हुए।

यह थीं स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद रफीक साबिर उर्फ खान सिद्दीकी अल हिन्द की जीवनी। कैसी लगी हमे कमेंट बॉक्स में जरूर बताए।

स्रोत :-

मोहम्मद रफीक साबिर (विकिपीडिया)

जिन्ना को चाकू मारने वाले देशभक्त के वारिस को रोटी भी नसीब नहीं (दैनिक भास्कर, 16/08/10)

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