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मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं क्यों (maidano ko sabhyata ka palan kehte hain kyon)

मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं क्यों (maidano ko sabhyata ka palan kehte hain kyon)
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मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं क्यों (maidano ko sabhyata ka palan kehte hain kyon)


यह काफी रोचक और सोच में डालने वाला सवाल है। किसी भी सभ्यता के स्थान के बारे में यदी आप जानने की कोशिश करेंगे तो, आप पाओगे कि, दुनियां की हर सभ्यता हमें नदियों के किनारे और मैदानी क्षेत्रों में ही बसी हुई देखने को मिलेंगी। इसके पीछे की कई सारी वजहें हैं। आइए जानते हैं। आख़िर क्यों दुनियां की हर सभ्यता हमें मैदानी क्षेत्र में ही बसी हुई मिलती है। आख़िर मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं क्यों (maidano ko sabhyata ka palan kehte hain kyon)

1) उपजाऊ मिट्टी होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं

मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है, मैदानों के मिट्टी का उपजाऊ होना। आपको बता दें कि, किसी भी सभ्यता के पोषण में सबसे बडी भूमिका खेती की होती हैं। इसके बीना कोई भी सभ्यता एक स्थान पर लंबे समय तक फल फूल नही सकती है। मैदानों की मिट्टी बाकी स्थानों से काफी उपजाऊ होती हैं। तथा यह समतल होने के कारण यहां खेती करना आसान होता है। इसलिए उपजाऊ मिट्टी होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं।

2) यातायात करना आसान होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं

बाकी उबड़खाबड़ पहाड़ों, घने जंगलों और बर्फीले स्थानों से काफी आसान यातायात व्यवस्था मैदानों में होती हैं। क्युकी मैदानों में रास्तों का, सड़कों का निर्माण करना और उनका इस्तेमाल करना काफी सहज है। आपको बता दें कि, किसी भी सभ्यता के लिए यातायात की सुविधा काफी महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए यातायात का निर्माण करना मैदानों में आसान होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं।

3) निवास के लिए आसान होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं

सभ्यता या संस्कृति लोगों से ही बनती हैं। जहां लोग बसते हैं, वही सभ्यता बसती हैं। पहाड़ों, जंगलों, रेगिस्तान, बर्फिले स्थानों में रहने से काफी आसान है मैदानों में रहना। क्युकी मैदानी क्षेत्र समतल होते है। जहां पर ज्यादा तर लोग रहना पसन्द करते हैं। जो परेशानियां मनुष्य को पहाड़ों, जंगलों, रेगिस्तान, बर्फिले स्थानों में रहने मे होती हैं, वह परेशानियां मनुष्य को मैदानी क्षेत्रों में नही होती हैं। यही कारण है कि, निवास के लिए मैदानी क्षेत्र आसान होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं।

4) संसाधनों के अच्छे स्रोत होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं

मानव जीवन सुखी समृद्ध होने के लिए सिर्फ अन्न की ही नहीं बल्कि अन्य भी कई सारे संसाधनों की जरुरत होती हैं। जैसे चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी और कोयला। आभूषण बनाने के लिए तथा अवजार बनाने के लिए लोहा, तांबा, पीतल, कांसा। घर बनाने के लिए मिट्टी, पत्थर आदि जैसे संसाधनों का अच्छा स्रोत मैदानी क्षेत्र है। इसलिए संसाधनों के अच्छे स्रोत मैदानी क्षेत्र होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं।

5) अनुकूल जलवायू होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं

मैदानों को सभ्यता का पालन कहते है। क्योंकि मैदानी इलाकों की जलवायू मनुष्य जीवन के लिए काफी अनुकूल होती है। अनुकूल जलवायू किसी भी प्राणी जगत के लिए जरुरी है। यही कारण है कि, बाकी प्रदेशों में पाई जाने वाली जलवायू मैदानों में पाई जाने वाली जलवायू से काफी खतरनाक होती हैं। जहा मनुष्य का लंबे समय तक टिक पाना मुश्किल होता है। मैदानों का अनुकूल जलवायू किसी भी सभ्यता के लिए अनुकूल होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं।

अंत में हम मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं क्यों (maidano ko sabhyata ka palan kehte hain kyon) इसके बारे में हम इतना ही कहना चाहेंगे कि, अनुकूल जलवायू, पर्याप्त मात्रा में गिरने वाली वर्षा, मंद गति से बहने वाली नदियां, उपजाऊ और समतल जमीन  आदि गुण होने के कारण मैदानों को सभ्यता का पालन कहते हैं।

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