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चाँद धरती से कितना दूर है और वहा पहुंचने में कितना समय लगता है? जानकर दंग रह जाएंगे आप

Chand prithvi se kitna dur hai
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आपको जानकर हैरानी होगी कि, जब धरती से हम चांद को देखते है तो, वह हमें बहुत करीब दिखाई देता है लेकिन वास्तव मे वह हमसे बहुत दूर है। चांद धरती से कितना दूर है? इसका उत्तर हम जीतना आसान समझ रहें हैं, उतना आसान नहीं है। तो फिर chand kitna dur hai? आइए जानते है।

चांद धरती से 384400 किलोमीटर (238855 मील) दूर है। Chand dharti se 384400 kilometre dur hai।

रात हो या दिन हर किसी के द्वारा आकाश में पहचानने योग्य सबसे अधिक कोई वस्तू है तो, वह चांद है। दुनिया भर के खगोलशास्त्री chand prithvi se kitna dur hai इस बारे में बताते हैं कि, चांद पृथ्वी से औसतन 384400 किलोमीटर (238855 मील) दूर है।

चांद और पृथ्वी के बिच की दूरी सब जगह एक नही है

आपको जानकर हैरानी होगी कि, चांद पृथ्वी से कितना दूर है। इसके बारे में वैज्ञानिक 238855 मील बताते हैं, जो चांद और पृथ्वी के बिच की एक औसत दूरी है। इस औसत दूरी के पीछे की वजह चांद की अंडाकार कक्षा है। आपको बता दें कि, चांद पृथ्वी के इर्दगिर्द अंडाकार कक्षा में परिक्रमा करता है। जिसके कारण एक समय चांद पृथ्वी के बिलकुल निकट आ जाता है। तो वहीं एक समय बिलकुल दूर चला जाता है। इसलिए चांद और पृथ्वी के बिच की दूरी का सही आकलन निकलना आसान नहीं है।

चांद धरती से कितना दूर है? इस बारे में बात करते वक्त खगोलविद हमे अलग अलग तीन संख्याओं को बताते हैं और इन तीनो दूरियों को खगोलविद अपभू, उपभू और औसत कहते हैं।

चांद और धरती के बिच की अपभू दूरी

जब चांद धरती से सबसे दूर होता है, तब चांद और धरती के बिच की दूरी सबसे अधिक मतलब 405696 किलोमीटर याने कि, 252088 मील होती हैं। जब चांद धरती से सबसे दूर होता है, तब खगोलविद चंद्रमा को अपभू स्थिती में है, ऐसा कहते हैं आपको बता दें कि, अपो का अर्थ दूर होता है। इसी से अपभू शब्द बना है।

चांद और धरती के बिच की उपभू दूरी

जैसे अपभू का मतलब सबसे दूर होता है। ठीक उसी तरह से उपभू का मतलब निकट होता है। याने कि, हम कह सकते हैं कि, जब चांद धरती के निकट होता है तब खगोलविद उस स्थिती को उपभू कहते हैं और इस स्थिती में चांद और धरती के बिच की दूरी केवल 363104 किलोमीटर या 225623 मील होती हैं।

चांद और धरती के बिच की औसत दूरी

चांद और धरती के बिच की दूरी की जो तीसरी अवस्था है, खगोलविद उसे औसत दूरी कहते हैं। जब चांद धरती से न ज्यादा दूर और न ज्यादा नजदीक होता है। उस दूरी को खगोलविद औसत दूरी कहते हैं। जो चांद और पृथ्वी के बिच की औसत दूरी 238855 मील अर्थात 384400 किलोमीटर है।

चांद सूर्य से कितना दूर है/chand Suraj se kitna dur hai

जैसे चांद पृथ्वी की परिक्रमा करता है। ठीक उसी तरह हमारी पृथ्वी भी सूर्य की परिक्रमा करती है। चांद और पृथ्वी दोनों भी सूर्य से औसत दूरी पर परिक्रमा करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि, चांद और पृथ्वी दोनों भी सूर्य से लगभग 150 मिलियन किलोमीटर मतलब 93 मिलियन मील के दूरी पर है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि, यह दूरी एक औसत दूरी है। यहां पर भी वक्त के साथ दूरी बदलती रहती है।

इस दूरी का अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं कि, जो प्रकाश 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड के रफ्तार से चलता है। उसे वहा से पृथ्वी पर पहुंचने में 8 मिनट लगते है। मान ले कि, अगर सूर्य अचानक से चमकना बंद कर देता है तो, हमें यह जानकारी 8 मिनट बाद पता चलेंगी।

Chand prithvi se kitna dur hai

Chand dharti se kitne kilometre dur hai

चांद धरती से कितना दूर है और वहा पहुंचने में कितना समय लगता है?

पृथ्वी से चांद पर पहुंचने में औसतन 3 दिन लगते है। लेकिन चांद पर कितने समय में पहुंचा जा सकता है? यह सही वक्त, सही दिशा और सही गती पर निर्भर करता है।

मान लो यदि हम 5 मिनट में 1 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ते हैं तो, हमें इसी गती में दौड़कर चांद पर पहुंचने में 32,033.33 घंटे अर्थात 1335 दिन लगेंगे।

इसी तरह यदि हम 40 मील प्रति घंटा की रफ्तार से गाड़ी चला रहे है तो, हमे चांद पर पहुंचने में लगभग 5791.375 घंटे अर्थात 241 दिन लगेंगे।

दुनिया भर में बुलेट ट्रेन की औसतन स्पीड 300 किमी प्रति घंटा है। यदि हम बुलेट ट्रेन से चांद पर जाने की सोच रहे हैं तो, हमें 1281.33 घंटे का या फिर 53.38 दिन का समय लगेगा।

यदि बात भारतीय ट्रेनों की करे तो, भारतीय ट्रेनों की औसत स्पीड केवल 80 किलोमीटर प्रति घंटा ही है। यदि हम भारतीय ट्रेन में बैठकर चांद की सैर करना चाहते हैं तो, हमे चांद पर पहुंचने में ही 6 महीने 20 दिन लगेंगे।

अंतरिक्ष यान को चांद पर पहुंचने में कीतना समय लगता है

लूना 1 यह पहला अंतरिक्ष यान है जो पहली बार चांद पर गया था। इस यान को सोवियत संघ जिसे वर्तमान में रूस कहा जाता है। इसके द्वारा सन 1959 में भेजा गया था और इस लूना 1 यान ने धरती से चांद पर पहुंचने में 1 दिन 10 घंटे लगाए थे।

“न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान” दुनिया का एक मात्र ऐसा यान है। जो चांद पर सबसे कम समय में पहुंचा। इस न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान ने धरती और चांद के बिच की दूरी को महज 8 घण्टे 35 मिनट में ही पूरा किया था। इस यान का यह रिकॉर्ड आज तक कोई नही तोड़ पाया है।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा 2003 में smart 1 नामक अंतरिक्ष यान चांद पर भेजा था। इस यान ने सबसे ज्यादा 1 साल 1 महीना और 2 सप्ताह का समय लिया था चांद पर पहुंचने में।

Prithvi se chand kitna dur hai/अपोलो मिशन को कीतना समय लगा था

मानवी अंतरिक्ष यात्रा को रोबोटिक अंतरिक्ष यात्रा की तुलना में ज्यादा समय लगता है। आपको बता दें कि, अपोलो 8, अपोलो 10, अपोलो 13 के अलावा चांद पर उतरने वाले सभी छह मिशनों को चांद की कक्षा में प्रवेश करने के लिए 78 घंटे (3 दिन 6 घंटे) से अधिक का समय लगा था। इन सभी अपोलो मिशनों में सबसे तेज मिशन अपोलो 8 था। जिसने चांद पर पहुंचने में 2 दिन,21 घंटे और 8 मिनट लिए थे। जबकी सबसे लंबा मिशन अपोलो 17 था। जिसने चांद पर पहुंचने में 3 दिन 14 घंटे और 41 मिनट लिए थे।

हर साल बढ़ रही है चांद और पृथ्वी के बिच की दूरी

अपोलो 11, अपोलो 14, अपोलो 15मिशनों के तहत और रूस द्वारा चांद पर भेजे गए दो रोवर्स (लूनोखोद 1 और लूनोखोद 2) ने चांद की सतह पर, अलग अलग स्थानों पर कुल पांच दर्पण लगाए। जिसका इस्तेमाल पृथ्वी पर के खोगालविद चांद की दुरी का अभ्यास करने के लिए करते है। पृथ्वी पर मौजुद खगोलविद चंद्रमा पर मौजुद इन सभी दर्पणो पर धरती से लेजर बीम को छोड़ते हैं और उससे चांद के दूरी का आकलन करते हैं। खगोलविदों द्वारा इस प्रकार से किए गए आकलन से यह जानकारी निकाली है कि, चांद पृथ्वी से हर साल 3.8 सेंटीमीटर से दूर होते जा रहा है।

इसका मतलब यह हुआ कि, भविष्य में हम सूर्य ग्रहण को वर्तमान के सूर्य ग्रहण की तरह नहीं देख सकेंगे। क्युकी भविष्य में सूर्य को चांद की डिस्क पूरी तरह नहीं छिपा पाएंगी।

नोट – यह लेख रॉयल ओब्जर्वेटरी, ग्रीनविच के एक खगोलशास्त्री के लेख पर आधारित है।

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2 thoughts on “चाँद धरती से कितना दूर है और वहा पहुंचने में कितना समय लगता है? जानकर दंग रह जाएंगे आप”

  1. चाँद और धरती से बीच की दुरी के बारे में आपने बहुत बढ़िया जानकारी दी धन्यवाद।

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