Skip to content

रामजी गोंड को नमन ये वो क्रांतिकारी थे जिन्होंने अंग्रेज़ो-निज़ामों से गुरिल्ला युद्ध लड़ा,बाद में उन्हें 1000 गोंड सैनिकों के साथ तेलंगाना में फाँसी दे दी गई.क्या ये इतिहास आपको पता है।

रामजी गोंड को नमन ये वो क्रांतिकारी थे जिन्होंने अंग्रेज़ो-निज़ामों से गुरिल्ला युद्ध लड़ा,बाद में उन्हें 1000 गोंड सैनिकों के साथ तेलंगाना में फाँसी दे दी गई.क्या ये इतिहास आपको पता है।
Rate this post

आज हम इस लेख में बात करेंगे भारत के एक महान, स्वाभिमानी और स्वतंत्रता सेनानी के बारे में। जिनका नाम भारत के इतिहास में गुमनाम है। जिहा बिलकुल क्युकी आप सभी जानते ही होंगे कि, भारत में इतिहास लेखन पर कई बार उंगली उठी है और उठती ही रहती है। कुछ लोगों को भारत के इतिहास में अच्छा स्थान देकर उनका गौरव किया गया है। भलेही उनका कार्य भारत के इतिहास मे अनमोल ना भी रहा हो। तो वही कुछ महान लोगो का इतिहास हमेशा के लिए दफन कर दिया गया।

भारत में इतिहास को ब्रिटिश सरकार से लेकर हमेशा से ही तरोड मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है और आज भी प्रस्तुत किया जाता है।

आप सभी देशवासी जानते ही है कि, इसके पीछे कौन है और उनका मकसद क्या है? खैर कोई बात नही। हम उन तमाम महान हस्तियों का इतिहास और उनके जीवन से जुड़ी तमाम जानकारी अपने वेबसाईट के जरिए आपके सामने लाते रहेंगे। जिसे मौजूदा व्यवस्था ने दबा कर रखा हुआ है।

आज के इस लेख में हम बात करने वाले है। एक महान राजा और स्वतंत्रता सेनानी के बारे में। जिनका नाम है “राजा रामजी गोंड” और जानेंगे उनके जीवन से जुड़े उन पहलूओं के बारे में जो उन्हे महान बनाते है।

जन्म :-

राजा रामजी गोंड जी का जन्म कब हुआ इसकी कोई खास जानकारी मौजूद नहीं है। लेकिन उनका जन्म कहा हुआ था। इसकी जानकारी बेशक मौजूद है। राजा रामजी गोंड जी का जन्म भारत का वर्तमान मे निर्मित राज्य तेलंगाना के “आसिफाबाद” मे हुआ था। यह शहर तेलंगाना के कामाराम भीम जिले मे आता है और वर्तमान में आसिफाबाद शहर कामाराम भीम जिले का मुख्यालय भी है।

जाती :-

अपने देश में ऐसे कई सारे राजे महाराजे हुए है। जो अपने धर्म के लिए, स्वार्थ के लिए लड़े और मरे है। लेकिन राजा रामजी गोंड एक ऐसे महान राजा और स्वतंत्रता सेनानी हुए है जो अपने देश के लिए, अपने स्वाभिमान के लिए लड़े है। वैसे तो हम उनके जाती, धर्म का उल्लेख नही करना चाहते है क्युकी वतन के खातिर मर मिटने वालों की कोई जाती नही होती है। लेकिन जानकारी के लिए आपको बता दे कि, राजा रामजी गोंड एक आदिवासी “गोंड” जाती से आते है। उनके जाती का उल्लेख हमे उनके नाम मे ही देखने को मिलता है।

राज्य :-

राजा रामजी गोंड जी के राज्य को “गोंड राज्य” के नाम से भी जाना जाता था। यह गोंड राज्य तेलंगाना के कई हिस्सों पर फैला हुआ था। जिनमें कामाराम भीम जिला, निर्मल, उत्नूर, चेन्नूरु, नागपुर, चाँद और बस्तर जिला शामिल है।

हैदराबाद के निजाम को दी थी शिकस्त :-

राजा रामजी गोंड से जुड़ा यह किस्सा काफी दिलचस्प है। हैदराबाद के निजाम आसफ जहा पंचम को अपने राज्य का विस्तार करना था। अपने राज्य के विस्तार के लिए निजाम की बुरी नजर गोंड राज्य पर थी। निजाम, राजा रामजी गोंड को युद्ध मे हरा कर उनके राज्य को अपने राज्य में विलीन करना चाहता था और इसके लिए वह अपनी सेना को तयार करने लगा। लेकिन यह खबर राजा रामजी गोंड को पता चली और उन्होंने भी खतरे की आशंका को भापकर अपने भी सेना को तयार करने लगे। राजा रामजी गोंड ने भी अपनी सेना को गोरिला युद्ध नीति मे काफी पारंगत किया। अपनी सेना को बढ़ाया और भी कई सारे बदलाव उन्होंने किए।

आखिरकार वह दिन आ ही गया। निजाम ने अपनी सेना के साथ पूरी ताकद से गोंड राज्य पर हमला किया। जवाबी कार्रवाई मे राजा रामजी गोंड ने भी पूरी ताकद के साथ निजाम के सेना पर धावा बोला। इस युद्ध मे राजा रामजी और उनकी सेना ने गोरिला युद्ध नीति से निजाम को बुरी तरह से हराया।

अंग्रेजों को भी दी थी एक बार शिकस्त :-

1857 तक देश के कई सारे राजाओं के संस्थानों को अंग्रेजों ने छल कपट से अपने राज्य में विलीन कर लिया था। तो कई राजाओं को अपना मांडलिक बना दिया था। 1857 तक भारत के कई सारे राजा केवल गद्दी के राजा बन कर रह गए थे। उनके राज्य के कारभार का पुरा नियंत्रण अंग्रेजों के पास मे था।

अंग्रेज गोंड राज्य के राजा रामजी गोंड को भी अपना मंडलिक बनाना चाहते थे। वे नही चाहते थे कि, ब्रिटिश भारत में उनका एक स्वतंत्र राज्य रहे। लेकिन राजा रामजी गोंड एक स्वाभिमानी राजा थे। वे भारत अपना स्वतंत्र राज्य रखना चाहते थे। अंग्रेजों ने काफी कोशिशे की। उन्हे अपने तरफ खीचने की, उन्हे झुकाने की। लेकिन गोंड राज्य के राजा रामजी गोंड नही झुके।

जब अंग्रेजों को लगा कि, राजा ऐसे झुकने वालों मे से नही है। तो अंग्रेजों ने अपनी सेना को गोंड राज्य पर आक्रमण करने को कहा।

जिसके बाद अंग्रेजों की सेना और गोंड राज्य की सेना के बीच एक जोरदार झड़प हुई। राजा रामजी गोंड और उनके सेना ने गोरिला युद्ध नीति को बड़े ही सोच समझ कर इस झड़प में इस्तेमाल किया और अंग्रेज सेना को बुरी तरह से हरा दिया।

लेकिन हार मिलने के बाद भी अंग्रेज सरकार चुप नही बैठी। उनकी सेना को राजा रामजी गोंड के सेना ने जिस तरह हरा दिया था। उसका सबक लेकर अंग्रेजों ने सीधे युद्ध के बजाय नया रास्ता अपनाया। क्युकी अंग्रेजों को सबक मिल चुका था कि, वे गोंड राज्य को सीधे युद्ध से नही जीत सकते।

इसके बाद अंग्रेजों ने अपने सैनिकों को अवैध रूप से गोंड राज्य दाखिल करके राज्य को हथियाने की साजिश रची। लेकिन अंग्रेजों की यह चाल नाकाम हुई। राजा रामजी गोंड ने अंग्रेजों के उन सभी सैनिको को पकड़ लिया जो राज्य में बिना इजाजत के घुसे थे। कहा जाता है कि, जिन सैनिको को राजा ने पकडा था जो राज्य में बिना इजाजत के घुसे थे। उन सभी को राजा रामजी गोंड ने मौत के घाट उतार दिया था।

इस घटना के बाद अंग्रेज सरकार अपने मंसूबों पर पानी फैरता देख काफी हताश हुई। बाद में उन्होंने गोंड राज्य को हड़पने के लिए और राजा रामजी गोंड को अपने वश मे करने के लिए एक नए अधिकारी की नियुक्ति की। जिसका नाम है “कर्नल रॉबर्ट“। ब्रिटिश सरकार ने गोंड राज्य के विलीनीकरण सारी जिम्मेदारी कर्नल रॉबर्ट को दी।

ब्रिटिश सेना के हार से कर्नल रॉबर्ट भी अच्छे से परिचित थे। इसलिए राजा रामजी गोंड को हराने के लिए वे एक अच्छे मौके की तलाश में थे। आखिरकार वह मौका कर्नल रॉबर्ट को 9 अप्रैल 1860 को मिला।

9 अप्रैल 1860 को कर्नल रॉबर्ट को एक गुप्त सूचना मिली कि, राजा रामजी गोंड निर्मल गाव, आदिलाबाद मे रुके हुए है। जैसे ही यह गुप्त सूचना प्राप्त हुई, वैसे ही कर्नल रॉबर्ट ने आदिलाबाद पर अपने बड़े साजो समान और सैनिकों के साथ आक्रमण किया। राजा रामजी गोंड अंग्रेजों के इस आक्रमण से बिलकुल बेखबर थे कि, ब्रिटिश सेना उन पर हमला करने वाली है। हमले से बेखबर राजा रामजी गोंड के आदिलाबाद को ब्रिटिश सेना ने चारों तरफ से घेर लिया। अब उनके पास अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण के अलावा ओर कोई चारा ही नही बचा था।

ब्रिटिश कर्नल रॉबर्ट को लगा कि, अब राजा उनके सामने आत्मसमर्पण करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नही। राजा रामजी गोंड ने चारों तरफ से घिरे हुए होते हुए भी, ब्रिटिश सेना के विरुद्ध मे हथियार उठाए और स्वाभिमान के साथ ब्रिटिश सेना के खिलाफ लढने लगे। लेकिन पूरे तयारी के साथ आए ब्रिटिश सेना के सामने राजा रामजी गोंड ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और वे हार गए।

लेकिन सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो यह था कि, राजा रामजी गोंड और उनके 1000 गोंड सरदार और सिपाहीयो को ब्रिटिशों ने जिंदा पकड़ लिया और उसी दिन यानी 9 अप्रैल 1860 को ही इन सभी सेनानियों को निर्मल गाव में मौजूद एक बरगद के पेड़ पर सभी गववासीयो के सामने फांसी पर लटका दिया गया।

ऐसा कहा जाता है कि, गोंड राज्य को ब्रिटिश भारत में विलीन करने के लिए कर्नल रॉबर्ट ने हैदराबाद के निजाम की सहायता ली थी और तो और निजाम ने भी अपने हार का बदला लेने के लिए कर्नल रॉबर्ट की सहायता की थी।

जिस बरगद के पेट पर राजा रामजी गोंड और उनके 1000 गोंड सरदारों को फासी पर लटका दिया था। देश आज भी इस बरगद के पेड़ को “वेयी पुरेला (खोपड़ी) चेट्टू” या “वेयी पुररेला मारी” के नाम से जाना जाता है।

यह भी पढ़े:-

👉 टंट्या भील एक ऐसे क्रांतिकारी हुए जिन्होंने ना सिर्फ अंग्रेजों को बल्कि अंग्रेजों की गुलामी करने वाले रियासतदारो, सेठ और साहूकारों तक को अंदर से हिला कर रख दिया। ऐसे भारत के इस रोबिन्हुड को सलामी दिये बिना आगे नहीं बढ़ती है ट्रेने।

राजा रामजी गोंड जी के द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ पुकारे गए इस विद्रोह को भारत का पहला विद्रोह भी कहा जाता है। भलेही राजा रामजी गोंड 9 अप्रैल 1860 को शहीद हुए होंगे। लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ उनकी लढाई कई सालों से जारी थी।

कहा जाता है कि, मंगल पांडे द्वारा पुकारा गया 1857 का विद्रोह इसी राजा रामजी गोंड से प्रेरित होकर पुकारा गया था। राजा रामजी गोंड से ही प्रेरित होकर मंगल पांडे ने ब्रिटिश अधिकारियों को मौत के घाट उतारा था।

दोस्तो यह वीर गाथा कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताए।

 

 

 

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!