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क्या है साइटोकाइन स्टॉर्म? जिससे कोरोना मरीज का अपना ही शरीर उसके खिलाफ़ हो जाता है।

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What is cytokine Storm|साइटोंकाइन स्टॉर्म क्या है| साइटोंकाइन स्टॉर्म मीनिंग इन हिंदी|cytokine storm in covid|

कोरोना महामारी के दरम्यान दुनियाभर में जो लाखों मौते हर दिन हो रही है। इन मौतों के पीछे की एक वजह, विशेषज्ञ ना केवल कोरोना वायरस को बल्कि साइटोंकाइन स्टॉर्म को भी मान रहे हैं। तो चलिए जानते हैं, यह साइटोंकाइन स्टॉर्म असल में है क्या? और यह कितना खतरनाक है? साइटोंकाइन स्टॉर्म होने का हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है? और इससे क्या वाकई में मौत होती है? आइए जानते हैं।

साइटोंकाइन स्टॉर्म को समझने से पहले हमें यह समझना होगा कि, यह साइटोंकाइन्स क्या है? और इसका क्या महत्व है?

दरअसल साइटोंकाइन्स हमारे शरीर में पाए जाने वाला एक प्रोटीन है। जो विभिन्न काशिकाओ द्वारा कई सारे कार्यों के लिए उत्पन्न किया जाता है। इन विभिन्न कार्यों में से एक कार्य साइटोंकाइन्स का इम्यून सिस्टम के तहत वायरस से मुकाबला करना भी होता है। हमारा इम्यून सिस्टम साइटोंकाइन्स प्रोटीन के मदद से वायरस के साथ मुकाबला करता है। इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने के लिए खुद भी साइटोंकाइन्स प्रोटीन को पैदा करता है।

दिल्ली स्थित सेंट स्टीफन अस्पताल के जानेमाने डॉ  मैथ्यू वर्गीस इस बारे में विस्तार बताते हुए कहते हैं कि, कोई भी वायरस जब हमारे शरीर पर हमला करता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम भी साइटोंकाइन्स प्रोटीन की मदद से उस वायरस से लड़ता है और उसे खत्म कर देता है।

लेकिन जब वायरस हमारे शरीर पर हमला करने के बाद तेजी से अपनी कॉपी बनाने लगता है, तो इम्युन सिस्टम भी वायरस से उतने ही तेजी से लड़ने के लिए बड़ी मात्रा में साइटोंकाइन्स प्रोटीन को पैदा करता है।

लेकिन कई बार साइटोंकाइन्स का जरूरत से ज्यादा बड़ी मात्रा में उत्पादन होने से, हमारा इम्युन सिस्टम अनियंत्रित हो जाता है और वह शरीर में दाखिल हुए वायरस के साथ साथ हमारे शरीर के बाकी हिस्सों पर भी हमला कर देता है।

आसान भाषा में कहे तो हमारा इम्यून सिस्टम अनियंत्रित होकर बागी हो जाता है और जिन कोशिकाओ की इस इम्यून सिस्टम को रक्षा करनी होती है। वह उनपर हमला करके उन्हे भी नष्ट करने लग जाता है।

इम्यून सिस्टम के इस बर्ताव से शरीर को जो हानी होती है, उसे ही साइटोंकाइन्स स्टॉर्म कहा जाता है। क्युकी इम्यून सिस्टम के इस बर्ताव के पीछे साइटोंकाइन्स प्रोटीन ही होता है और इसीलिए इस प्रोटिन के नाम पर से ही इसे साइटोंकाइन्स स्टॉर्म कहा जाता है।

साइटोंकाइन्स स्टॉर्म की स्थिती में हमारी प्रतिरक्षा कोशिकाए फेफड़ों के पास जमा होकर, उसपर हमला बोल देती है। जिस कारण खून की नसे फट जाती है और उस में से खून का रिसाव होने लगता है। कई बार नसों में खून के थक्के तक बन जाते है। जिसका नतीजा यह होता है कि, हमारा बल्ड प्रेशर कम हो जाता है और ब्लड प्रेशर कम होने से हमारा दिल, फेफड़े और दिमाग जैसे कई नाजुक अंग काम करना बन्द कर देते हैं।

बीबीसी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया है कि, जब मरीज को साइटोंकाइन्स स्टॉर्म होता है, तब प्रतिरक्षा कोशिकाए हमारे खून पर हमला करके उनमें से लाल और सफेद सेल्स को ख़त्म कर देते हैं और हमारे जिगर को प्रभावित करते हैं। जिस कारण मरीज कोमा में चला जाता है।

विशेषज्ञ मानते है कि, दुनियां भर में जो वर्तमान में मौतें हो रही है उसके पीछे कोरोना महामारी नही बल्कि साइटोंकाइन्स स्टॉर्म है। विशेषज्ञों का मानना है कि, कोरोना से पहले जितनी भी महामारियां दुनियां में आई है। जैसे 1918 में फ्लू महामारी, 2003 सार्स महामारी और एच 1एन 1 स्वाइन फ्लू आदि में जो मौतें हुई है। वो शायद वायरस की वजह से नही, बल्कि मरीज के शरीर के इम्यून सिस्टम के अत्याधिक सक्रीय होने की वजह से हुई है।

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और इस इम्यून सिस्टम के अत्याधिक सक्रीय होने के पीछे की वजह साइटोंकाइन्स प्रोटीन है।

स्रोत :-

कोरोना संक्रमण से मरने और बचने वालों में इस फ़र्क़ को समझिए (बीबीसी हिंदी न्यूज, 15 मई 2020)

Cytokine Storm in Covid (नवभारत टाइम्स, 18 May 2021)

कोरोना वायरस: क्या होता है साइटोकाइन स्टॉर्म, जो प्रतिरक्षा तंत्र को ही बना देता है शरीर का दुश्मन (अमर उजाला, 18 May 2021)

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